विदेश न्यूज डेस्क. BDC NEWS| bhopalonline.org
पश्चिम एशिया में युद्ध की आग अब बेकाबू होती नजर आ रही है। इजराइल और ईरान के बीच प्रत्यक्ष संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति को हिलाकर रख दिया है। ताजा घटनाक्रम में इजराइल ने ईरान के कई रणनीतिक शहरों पर अब तक के सबसे घातक हमले किए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में हाहाकार मचा हुआ है।
तेहरान और इस्फहान समेत कई ईरानी शहरों पर इजराइली प्रहार
इजराइल ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को और अधिक आक्रामक बना दिया है। इजराइली वायुसेना ने ईरान की राजधानी तेहरान, परमाणु केंद्र के लिए चर्चित इस्फहान और कई अन्य महत्वपूर्ण शहरों को निशाना बनाया है। इन हमलों में ईरान के सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचने की खबरें हैं। हमलों के जवाब में ईरान के कड़े तेवर सामने आए हैं। ईरान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इजराइल के ये हमले जारी रहते हैं, तो भविष्य में किसी भी प्रकार की शांति वार्ता या कूटनीतिक बातचीत की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी। ईरान का यह रुख संकेत देता है कि वह अब लंबी जंग के लिए तैयार है।
ईरान-इजराइल जंग में तुर्किए की सीधी एंट्री
इस युद्ध में अब एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया है। नाटो सदस्य देश तुर्किए ने इस संघर्ष में अपनी सीधी सक्रियता दिखाते हुए सभी को चौंका दिया है। समुद्र के ऊपर से गुजर रही एक ईरानी बैलेस्टिक मिसाइल को तुर्किए की सेना ने मार गिराया है। तुर्किए के इस कदम के बाद मिडिल ईस्ट का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। अब तक केवल बयानबाजी तक सीमित रहने वाले पड़ोसी देश अब सैन्य रूप से आमने-सामने आ रहे हैं, जिससे यह आशंका प्रबल हो गई है कि यह संघर्ष क्षेत्रीय सीमाएं लांघकर तीसरे विश्व युद्ध की आहट दे सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में लगी आग, 2022 के बाद उच्चतम स्तर
ईरान और इजराइल के बीच जारी इस भीषण जंग का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा है। आपूर्ति बाधित होने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगी हैं। कच्चा तेल साल 2022 के बाद अपने सबसे महंगे स्तर पर पहुँचते हुए 115 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। तेल की कीमतों में इस उछाल से दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि ईरान दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों में से एक है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते होने वाली सप्लाई पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में कोहराम और रुपये की ऐतिहासिक गिरावट
इस वैश्विक अस्थिरता की तपिश भारतीय बाजारों तक भी पहुँच गई है। युद्ध की खबरों के बीच निवेशकों में मची भगदड़ के कारण सेंसेक्स 1353 अंक टूटकर 77,566 के स्तर पर बंद हुआ। बाजार की इस गिरावट ने निवेशकों के अरबों रुपये डूबो दिए हैं। केवल शेयर बाजार ही नहीं, बल्कि भारतीय मुद्रा ‘रुपया’ भी इस संकट की चपेट में है। डॉलर की मजबूती और विदेशी फंडों की निकासी के चलते रुपया 92.33 के अपने ऑल-टाइम लो (All-time Low) यानी अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में गिरावट और गहरी हो सकती है।
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