श्योपुर.
BDC News | bhopalonline.org
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां नामीबियाई मादा चीता ‘ज्वला’ (जिसे KGP12 के नाम से भी जाना जाता है) के चार शावकों की मौत हो गई है। यह घटना वन्यजीव प्रेमियों और प्रोजेक्ट चीता के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है।
कूनो में मातम: चार शावकों की संदिग्ध मौत
कूनो नेशनल पार्क के अधिकारियों को मंगलवार को नियमित निगरानी के दौरान मादा चीता ज्वला के चार शावकों के शव मिले। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना उस समय और भी विचलित करने वाली हो गई जब शावकों के शव क्षत-विक्षत अवस्था में पाए गए।
शवों की स्थिति और मौत के कारण
- अधपके शव: वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, शावकों के शव ‘आधे खाए हुए’ मिले हैं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि किसी अन्य शिकारी जानवर ने उन पर हमला किया होगा।
- शिकारी का हमला: पार्क प्रबंधन इस बात की जांच कर रहा है कि क्या यह हमला किसी तेंदुए या जंगली कुत्ते द्वारा किया गया है, जो कूनो के जंगलों में अक्सर सक्रिय रहते हैं।
- तापमान और कमजोरी: जांच का एक पहलू भीषण गर्मी और शावकों की शारीरिक कमजोरी भी हो सकता है, जिसके कारण वे शिकारियों का मुकाबला नहीं कर पाए होंगे।
प्रोजेक्ट चीता को लगा बड़ा झटका
भारत में चीतों के पुनर्वास के लिए शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट चीता’ के तहत ज्वला के शावकों का जन्म एक बड़ी सफलता माना गया था। ज्वला ने लगभग एक महीने पहले ही इन शावकों को जन्म दिया था।
- ज्वला की स्थिति: अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मादा चीता ज्वला सुरक्षित है, लेकिन वह अपने शावकों को खोने के बाद तनाव में दिख रही है।
- निगरानी पर सवाल: इतनी कड़ी सुरक्षा और ट्रैकिंग के बावजूद शिकारियों द्वारा शावकों को मार देना पार्क की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
- विशेषज्ञों की टीम: शावकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों और शिकारी जानवर की पहचान हो पाएगी।
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