Headlines

    दतिया : भीतरघात और असंतोष ने पार्टी को दिखाया आईना, संगठन पर चला चाबुक, नरोत्तम जमावट पूरी तरह खत्म

    दतिया : भीतरघात और असंतोष ने पार्टी को दिखाया आईना, संगठन पर चला चाबुक, नरोत्तम जमावट पूरी तरह खत्म
    👁️ 253 Views

    भोपाल। BDC NEWS
    bhopalonline.org

    दतिया विधानसभा उपचुनाव के परिणाम भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिए महज एक राजनीतिक झटका नहीं, बल्कि अंतर्कलह और असंतोष के विरूद्ध एक गंभीर चेतावनी साबित हुए हैं। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह के हाथों भाजपा की यह शिकस्त इस बात का प्रमाण है कि पार्टी के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था। इस हार के तुरंत बाद प्रदेश नेतृत्व द्वारा जिला कार्यकारिणी से लेकर सभी मंडलों, मोर्चों, प्रकोष्ठों, प्रकल्पों और विभागों की इकाइयों को भंग किया जाना यह दर्शाता है कि पार्टी अब अनुशासनहीनता और भीतरघात पर किसी भी प्रकार का नरमी बरतने के मूड में नहीं है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल द्वारा बनाई गई विशेष समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह सख्त कार्रवाई राजनीति के गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गई है।

    टिकट के साथ ही शुरू हो गई थी हार की पटकथा

    इस राजनीतिक उठापटक की पटकथा टिकट वितरण के साथ ही लिख दी गई थी। भाजपा ने इस सीट पर अपने दिग्गज नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का पत्ता काटकर आशुतोष तिवारी को चुनावी मैदान में उतारा था। नेतृत्व का यह फैसला स्थानीय स्तर पर भारी विरोध का सबब बना। टिकट कटने से आहत समर्थकों और कार्यकर्ताओं का गुस्सा सड़कों पर फूटा, जिसके चलते कई कार्यकर्ताओं पर मुकदमे तक दर्ज किए गए। हालांकि स्थिति को संभालने के लिए नरोत्तम मिश्रा को स्वयं मैदान में उतरना पड़ा और उन्होंने अपने समर्थकों से आशुतोष तिवारी के पक्ष में काम करने की अपील की, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जो दरारें पड़ चुकी थीं, उन्हें भरना आसान नहीं था। चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए बागी पोस्ट, पत्र और स्थानीय नेताओं की चुप्पी ने आग में घी का काम किया। अब पार्टी उन तमाम चेहरों की पहचान करने में जुट गई है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पार्टी के खिलाफ काम किया है।

    पहले ही ठान ली थी भितरघात की

    मुख्यमंत्री आवास पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा और चुनाव प्रभारी भारत सिंह कुशवाह समेत करीब 25 दिग्गज नेताओं की मौजूदगी ने इस हार की गंभीरता को उजागर कर दिया। यह बैठक इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी आलाकमान अब केवल खानापूर्ति करने के बजाय जड़ तक जाकर कारणों की पड़ताल कर रहा है। नरोत्तम मिश्रा को टिकट ने मिलने के बाद अध्यक्ष रघुवीर शरण कुशवाह समेत कई पदाधिकारियों के इस्तीफे की पेशकश और उसके बाद बनी असमंजस की स्थिति ने संगठन की कार्यप्रणाली पर पहले ही सवाल खड़े कर दिए थे। प्रचार के दौरान पार्टी ने नरोत्तम का तैयार किया गया दतिया भाजपा का ढांचे पर नरमी रखी। सभा में नरोत्तम के आंसुओं ने समर्थकों के दिल में भीरतघात की ठान ली थी। हार हुई, संगठन ने जिला भाजपा से नरोत्तम का प्रभाव कम करने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक की।

    अर्श से फर्श तक नरोत्तम

    नरोत्तम मिश्रा और कभी प्रदेश की राजनीति में नंबर टू माने जाते थे। शाह के करीब कहा जाता था, हासिए पर पहुंच गए हैं। मिश्रा खुद कह दिया है अब मेरा राजनीतिक पटाक्षेप हो गया है। सक्रिय राजनीति में नहीं रहूंगा यानी खुद पर कार्रवाई से पहले नरोत्तम मिश्रा ने खुद पर कार्रवाई कर ली र्है। राजेन्द्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद डॉ नरोत्तम मिश्रा का प्रचार, टिकट कटना, मन से आशुतोष तिवारी का प्रचार करने कसम खाने के बाद जमीन स्तर पर उनका प्रभाव नहीं दिखा। वैसे भी नरोत्तम ने दतिया को भाजपा का जमीनी स्तर पर खड़ा किया था।

    लेटेस्ट अपडेट



    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *