जबलपुर।
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अत्यंत संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने भोपाल की एक 52 वर्षीय महिला को ‘असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (ART) रेगुलेशन एक्ट’ के तहत निर्धारित आयु सीमा के बावजूद इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) प्रक्रिया से गुजरने की कानूनी अनुमति प्रदान कर दी है।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक ऐसे दंपत्ति का है, जिन्होंने 19 अक्टूबर 2025 को अपने 21 वर्षीय इकलौते बेटे को खो दिया था। ऑर्गन फेलियर और पीलिया के कारण हुई इस दुखद क्षति के बाद दंपत्ति गहरे सदमे में था। अपनी सूनी गोद को भरने की इच्छा के साथ, उन्होंने IVF के जरिए माता-पिता बनने का निर्णय लिया।
हालाँकि, जब वे अस्पताल पहुंचे, तो उन्हें कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ा। ‘असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021’ की धारा 21 के अनुसार, IVF उपचार के लिए महिलाओं की अधिकतम आयु 50 वर्ष और पुरुषों की 55 वर्ष निर्धारित है। महिला की आयु 52 वर्ष होने के कारण अस्पताल ने प्रक्रिया करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद दंपत्ति ने न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का निष्कर्ष
मामले की गंभीरता को समझते हुए, जस्टिस विशाल मिश्रा की पीठ ने 20 जनवरी को दंपत्ति को भोपाल के जिला मेडिकल बोर्ड के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया। 27 फरवरी को बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें निम्नलिखित तथ्य सामने आए:
- दंपत्ति का स्वास्थ्य: पति को मधुमेह (Diabetes) और उच्च रक्तचाप (BP) की समस्या है, जो दवाओं से नियंत्रित है। पत्नी को भी उच्च रक्तचाप की शिकायत है।
- चिकित्सकीय राय: व्यापक जांच के बाद, मेडिकल बोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि महिला के लिए सरोगेसी या ऊसाइट डोनेशन (Oocyte Donation) के साथ IVF प्रक्रिया की योजना बनाना चिकित्सकीय रूप से संभव है।
अदालत का रुख और कानूनी आधार
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील की दलीलों और पूर्व में दिए गए न्यायिक फैसलों को आधार बनाते हुए यह स्पष्ट किया कि सिर्फ 50 वर्ष से अधिक उम्र होने के कारण किसी के आवेदन को खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि मेडिकल संस्थान केवल यह तय करने के लिए अधिकृत है कि प्रक्रिया चिकित्सकीय रूप से कितनी संभव है।
दंपत्ति ने अदालत में एक महत्वपूर्ण शपथ पत्र भी दिया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी पूर्ण सहमति और जोखिम पर यह उपचार करवा रहे हैं। इसके लिए वे किसी भी डॉक्टर या संस्थान को जिम्मेदार नहीं ठहराएंगे। इस छूट के साथ, अदालत ने उन्हें अपनी पसंद के किसी भी संस्थान में उपचार कराने की अनुमति दे दी है।
केस के मुख्य बिंदु
| विवरण | मुख्य तथ्य |
| बेटे का निधन | 19 अक्टूबर 2025 (21 वर्ष की आयु में) |
| कानूनी चुनौती | ART एक्ट 2021 के तहत महिला की अधिकतम उम्र 50 वर्ष निर्धारित। |
| मेडिकल रिपोर्ट | 27 फरवरी को मेडिकल बोर्ड ने प्रक्रिया के लिए हरी झंडी दी। |
| अदालत का निर्णय | उम्र सीमा को दरकिनार कर उपचार की अनुमति दी गई। |
यह फैसला उन सभी दंपत्तियों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो उम्र की कानूनी बंदिशों के कारण अपने माता-पिता बनने के सपने को पूरा करने में असमर्थ थे। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मानवीय संवेदनाएं और चिकित्सकीय संभावनाएं कानूनी प्रक्रियाओं से ऊपर हो सकती हैं।
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