नई दिल्लीद|BDC News| bhopalonline.org
13 साल तक बिस्तर पर पत्थर सा पड़ा रहा शरीर, कभी न खुलने वाली जुबान और बस मशीनों के सहारे चलती सांसें… हरीश राणा की यह लंबी और दर्दनाक जंग बुधवार को थम गई। सुप्रीम कोर्ट से ‘इच्छा मृत्यु’ (Passive Euthanasia) की ऐतिहासिक अनुमति मिलने के बाद, हरीश ने एम्स (AIIMS) में अंतिम सांस ली। ग्रीन पार्क के श्मशान घाट पर जब उनकी चिता को मुखाग्नि दी गई, तो वहां मौजूद हर आंख नम थी, लेकिन एक सुकून भी था कि हरीश अब उस दर्द से आजाद हो गया है जिसने उसे एक दशक से ज्यादा समय तक जकड़ रखा था।
एक झटके में थम गई थी जिंदगी
साल 2013 का वह मनहूस दिन आज भी परिवार के जेहन में ताजा है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र 19 वर्षीय हरीश रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन से फोन पर बात कर रहे थे। इसी दौरान संतुलन बिगड़ा और वह पीजी की चौथी मंजिल से नीचे गिर गए। उस हादसे ने हरीश को ‘परमानेंट वेजिटेटिव स्टेट’ (स्थायी वनस्पति अवस्था) में पहुंचा दिया। 13 सालों तक वह न हिल सके, न बोल सके, बस कभी-कभी झपकती आंखें ही उनके जीवित होने का प्रमाण थीं।
माता-पिता का संघर्ष: जब ‘मौत’ के लिए जोड़नी पड़ी हाथ
दुनिया में कोई भी माता-पिता अपने बच्चे के लिए मौत नहीं मांगते, लेकिन हरीश के माता-पिता ने उसका तिल-तिल कर मरना देखा था। जब डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए और उम्मीद की हर किरण बुझ गई, तब उन्होंने भारी मन से न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया। उनका तर्क था कि उनके बेटे को इस ‘लिविंग डेथ’ से मुक्ति मिलनी चाहिए। दिल्ली हाई कोर्ट से निराशा मिलने के बाद, अंततः 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मानवीय गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए ‘पैसिव यूथेनेशिया’ की इजाजत दी।
अंतिम सफर: धीरे-धीरे थमती सांसें
14 मार्च को हरीश को एम्स में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने प्रक्रिया के तहत धीरे-धीरे लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाना शुरू किया। पिछले एक हफ्ते से उन्हें भोजन-पानी नहीं दिया जा रहा था, केवल दर्द निवारक दवाएं दी जा रही थीं ताकि विदाई के समय उन्हें तकलीफ न हो। 24 मार्च को उनकी आत्मा ने उस शरीर को त्याग दिया जो पिछले 13 साल से उनके लिए एक जेल बन चुका था।
“हरीश के शरीर में आत्मा का एक जीवन पूरा हुआ, अब उसे शांति से विदा करें।” — लवली दीदी
न्याय और संघर्ष का घटनाक्रम (Timeline)
- 20 अगस्त 2013: पीजी की चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर घायल।
- वर्ष 2022: माता-पिता ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
- 8 जुलाई 2024: हाई कोर्ट ने याचिका खारिज की।
- 11 मार्च 2026: सुप्रीम कोर्ट ने इच्छा मृत्यु की अनुमति दी।
- 24 मार्च 2026: एम्स में हरीश का निधन।
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