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    धार भोजशाला: कोर्ट के आदेश पर ‘कवच’ में पूजा और नमाज

    धार भोजशाला में पूजा अर्चना शुरू हुई धार भोजशाला में पूजा अर्चना शुरू हुई
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    धार (मध्य प्रदेश): BDC News/bhopalonline.org

    ऐतिहासिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील धार की भोजशाला में आज आस्था और व्यवस्था की कड़ी परीक्षा है। साल 2026 में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक ही दिन होने के कारण यहाँ का माहौल पूरी तरह सुरक्षा घेरे में है। सर्वोच्च न्यायालय के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बाद, प्रशासन ने पूजा और नमाज के लिए अलग-अलग समय और स्थान निर्धारित कर चाक-चौबंद व्यवस्था की है।

    सूर्योदय से वाग्देवी की आराधना शुरू

    हिंदू श्रद्धालुओं के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है। शुक्रवार तड़के सूर्योदय के साथ ही परिसर में मां सरस्वती (वाग्देवी) की विशेष पूजा-अर्चना और हवन प्रारंभ हो गया है। श्रद्धालु पूरे भक्ति भाव के साथ सूर्यास्त तक चलने वाले अनुष्ठानों में भाग ले रहे हैं। ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष को सूर्योदय से सूर्यास्त तक निर्बाध पूजा करने की अनुमति प्रदान की है।

    नमाज के लिए निर्धारित समय

    चूंकि आज शुक्रवार है, इसलिए मुस्लिम समुदाय के लिए भी यह दिन विशेष है। कोर्ट के आदेशानुसार, परिसर के एक निश्चित हिस्से में दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे तक जुमे की नमाज अदा करने की व्यवस्था की गई है। इस दौरान सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं ताकि पूजा और नमाज की प्रक्रियाओं में कोई व्यवधान न आए।

    सुरक्षा का अभेद्य किला: AI और ड्रोन से निगरानी किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए धार प्रशासन ने भोजशाला को छावनी में तब्दील कर दिया है।

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    • सुरक्षा बल: सीआरपीएफ (CRPF), रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और स्थानीय पुलिस के 8000 से अधिक जवान तैनात हैं।
    • हाई-टेक मॉनिटरिंग: पहली बार इस क्षेत्र में निगरानी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक, उन्नत ड्रोन और हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरों का उपयोग किया जा रहा है।
    • अधिकारी तैनात: चप्पे-चप्पे पर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस बल की पैनी नजर बनी हुई है।

    अदालती आदेश

    गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह मध्य मार्ग निकाला था। कोर्ट ने प्रशासन को सख्त हिदायत दी थी कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने न पाए और दोनों समुदायों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए। इसी के पालन में आज धार में शांति समितियों और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता दिखाई दे रही है।


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