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MP नर्सिंग : प्रवेश प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी: अब 12वीं के अंकों से मिलेगा सीधा एडमिशन!

MP नर्सिंग : प्रवेश प्रक्रिया में बड़े बदलाव की तैयारी: अब 12वीं के अंकों से मिलेगा सीधा एडमिशन!

भोपाल।
BDC News | bhopalonline.org
मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में दाखिले की प्रक्रिया को और अधिक सरल और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण बदलाव पर विचार कर रही है। अब तक चली आ रही जनरल नर्सिंग सिलेक्शन टेस्ट (GNST) की अनिवार्यता को समाप्त कर, आगामी शैक्षणिक सत्र से कक्षा 12वीं के अंकों के आधार पर सीधे प्रवेश देने की योजना बनाई जा रही है।

प्रवेश नियमों में बदलाव की मुख्य वजह

शनिवार को मध्य प्रदेश के अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने नर्सिंग काउंसिल के कामकाज की गहन समीक्षा की। इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) की तर्ज पर राज्य में एक समान प्रवेश नियमावली लागू करना था। वर्तमान में, मध्य प्रदेश के सरकारी और निजी कॉलेजों में तीन वर्षीय जीएनएम (GNM) कोर्स के लिए प्रवेश प्रक्रिया कर्मचारी चयन मंडल (ESB) द्वारा आयोजित GNST परीक्षा के माध्यम से होती है।

मप्र नर्सिंग काउंसिल की अध्यक्ष डॉ. बीनू कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि विभाग की प्राथमिकता नर्सिंग शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और कॉलेजों में छात्रों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित करना है।


प्रस्ताव लागू होने पर क्या बदल जाएगा?

  1. प्रवेश परीक्षा से मुक्ति: यदि यह नया प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो छात्रों को नर्सिंग कॉलेजों में सीट पाने के लिए अलग से कोई राज्य स्तरीय प्रवेश परीक्षा (GNST) नहीं देनी होगी।
  2. मेरिट आधारित चयन: एडमिशन की पूरी प्रक्रिया छात्र के कक्षा 12वीं के अंकों (मेरिट) पर आधारित होगी। इससे प्रवेश प्रक्रिया में होने वाली देरी और जटिलता कम होगी।
  3. राष्ट्रीय मानकों से समानता: कई भारतीय राज्यों में पहले से ही नीट (NEET) के अंकों या 12वीं की मेरिट के आधार पर नर्सिंग में प्रवेश दिया जा रहा है। मध्य प्रदेश भी अब इसी राह पर चलने की तैयारी में है।
  4. गुणवत्ता और समय की बचत: एक समान प्रवेश नियम लागू होने से शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सकेंगे और प्रवेश परीक्षाओं के आयोजन पर होने वाला खर्च व समय बचेगा।

इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) के मापदंडों का पालन

समीक्षा बैठक के दौरान यह चर्चा हुई कि नर्सिंग कॉलेजों में फर्जीवाड़े को रोकने और शिक्षा के स्तर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने के लिए INC के नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य है। नए सत्र से एक ही नियम और एक ही पोर्टल के जरिए काउंसलिंग होने की संभावना है, जिससे छात्रों को भटकना नहीं पड़ेगा।


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