खाद्य विभाग का बड़ा खुलासा: रिटायर्ड अफसर और रिश्तेदारों का ‘गैस सिंडिकेट’ उजागर
Highlights
- कार्रवाई: एडीएम को रिपोर्ट सौंपी गई, लाइसेंस निरस्त और FIR की तैयारी।
- फर्जी वसूली: 5,000 ग्राहकों से बिना निरीक्षण 10 लाख रुपये ऐंठे।
- ब्लैक मार्केटिंग: 2,000 से ज्यादा छोटे और सैकड़ों घरेलू सिलेंडर स्टॉक से गायब।
- ओटीपी फ्रॉड: बिना ओटीपी बिल जनरेट कर अन्य जगह बेची गई गैस।
भोपाल।
BDC News | bhopalonline.org
भोपाल के जेके रोड और कोटरा सुल्तानाबाद क्षेत्र में संचालित गैस एजेंसियों में चल रहे बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। खाद्य विभाग की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि जेके रोड स्थित फिनिक्स एचपीसीएल (Phoenix HPCL) और कोटरा सुल्तानाबाद की बीएस एचपी गैस एजेंसी (BS HP Gas) में उपभोक्ताओं के हक पर डाका डाला जा रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि इन विवादित एजेंसियों के तार खाद्य विभाग के ही एक रिटायर्ड सहायक आपूर्ति अधिकारी बीपी शर्मा और उनके करीबियों से जुड़े हैं। करीब 36 हजार वर्गफीट में फैले इनके साझा गोदामों की जांच के बाद खाद्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट एडीएम प्रकाश नायक को सौंप दी है, जिसमें लाइसेंस निरस्त करने से लेकर एफआईआर (FIR) तक की सिफारिश की गई है
‘कैश एंड कैरी’ के नाम पर लाखों की लूट

जांच टीम को स्टॉक मिलान के दौरान फिनिक्स एजेंसी में भारी अनियमितताएं मिली हैं। यहाँ से न केवल 350 घरेलू और 350 कमर्शियल सिलेंडर नदारद थे, बल्कि 5 किलो वाले करीब 2 हजार ‘छोटू’ सिलेंडर भी गायब पाए गए। इसी तरह बीएस एजेंसी के गोदाम से भी 254 भरे हुए सिलेंडर गायब मिले। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा भी हुआ कि ग्राहकों ने ऑनलाइन बुकिंग तो की, लेकिन उन्हें सिलेंडर कभी मिले ही नहीं। उनके मोबाइल पर ‘डिलीवर्ड’ का मैसेज भेज दिया गया, जबकि असल में वे सिलेंडर अधिक दामों पर ब्लैक में बेच दिए गए। इतना ही नहीं, होम डिलीवरी न देकर ट्रक से ही सिलेंडर पकड़ाने के बावजूद ग्राहकों से डिलीवरी शुल्क वसूला गया, जिससे हर महीने करीब 2 लाख रुपये की अवैध कमाई की जा रही थी।
10 लाख की ठगी और ओटीपी का खेल
फिनिक्स एचपीसीएल में उपभोक्ताओं को लूटने के लिए 10 अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे थे। सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा ‘सुरक्षा निरीक्षण’ के नाम पर किया गया, जहाँ ग्राहकों के घर जाए बिना ही उनसे 238-238 रुपये वसूल लिए गए। करीब 5 हजार उपभोक्ताओं से इस तरह 10 लाख रुपये की ठगी की गई। डिजिटल सुरक्षा को ताक पर रखते हुए एजेंसी ने बिना ओटीपी (OTP) के ही फर्जी बिल जनरेट कर दिए और गैस की सप्लाई अन्य जगहों पर डायवर्ट कर दी। इसके अलावा, पीलूखेड़ी डिपो से आने वाले ट्रक जो मात्र 2 घंटे में भोपाल पहुँचने चाहिए थे, वे 24 घंटे बाद पहुँच रहे थे, जिससे अवैध रिफिलिंग और परिवहन का संदेह और गहरा गया है।
लाइसेंस निरस्त करने की तैयारी, कलेक्टर के पाले में गेंद
जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि इन एजेंसियों ने न केवल नियमों का उल्लंघन किया, बल्कि आवासीय क्षेत्रों के पास गोदाम बनाकर सुरक्षा मानकों को भी खतरे में डाला है। एडीएम को सौंपी गई इस रिपोर्ट में फिनिक्स और बीएस एजेंसी सहित करीब 10-12 अन्य अवैध रिफिलिंग मामलों का जिक्र है। कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुमोदन के बाद अब इन एजेंसियों के लाइसेंस निरस्त करने का प्रस्ताव संबंधित गैस कंपनियों को भेजा जाएगा। प्रशासन की इस कड़ी कार्रवाई से शहर की अन्य गैस एजेंसियों में भी हड़कंप मच गया है, क्योंकि इस पूरे मामले में भारी जुर्माना और संचालकों की गिरफ्तारी की संभावना प्रबल है।
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