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मोदी कैबिनेट फैसले : ‘कपास क्रांति’ से बदलेगी 32 लाख किसानों की तकदीर

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नई दिल्ली।
BDC News | bhopalonline.org

भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देने और आत्मनिर्भरता के संकल्प को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने कृषि क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ‘कपास क्रांति’ योजना को मंजूरी दी गई है, जिस पर 5,669 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य देश के 32 लाख कपास किसानों को सीधे तौर पर लाभान्वित करना है। चूंकि 2030-31 तक कपास की मांग बढ़कर 450 लाख गांठ होने का अनुमान है, इसलिए सरकार उन्नत अनुसंधान और नई उत्पादन तकनीकों के जरिए उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दे रही है।

सेमीकंडक्टर हब की ओर बढ़ते कदम

तकनीकी क्षेत्र में भारत की वैश्विक धाक जमाने के लिए सरकार ने सेमीकंडक्टर विनिर्माण पर बड़ा दांव लगाया है। कैबिनेट ने 3,936 करोड़ रुपये की कुल लागत से ‘क्रिस्टल’ और ‘सूचि’ नामक दो नई सेमीकंडक्टर इकाइयों की स्थापना को मंजूरी दी है। यह निवेश न केवल देश की इलेक्ट्रॉनिक्स आयात पर निर्भरता कम करेगा, बल्कि भारत को चिप निर्माण के वैश्विक मानचित्र पर एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करेगा। यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ के तहत उच्च-तकनीकी रोजगार सृजन में भी मील का पत्थर साबित होगी।

समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर में मजबूती

समुद्री व्यापार और बुनियादी ढांचे को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए सरकार ने गुजरात के वडीनार में एक नई जहाज मरम्मत सुविधा (Ship Repair Facility) स्थापित करने का निर्णय लिया है। 1,570 करोड़ रुपये के निवेश से तैयार होने वाली यह सुविधा भारत की समुद्री क्षमताओं को नया विस्तार देगी। इससे भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय जहाजों को मरम्मत के लिए विदेशी डॉकयार्ड पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा, जिससे न केवल समय की बचत होगी बल्कि बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।

आपातकालीन क्रेडिट लाइन का विस्तार

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अस्थिरता के प्रभावों को भांपते हुए, सरकार ने भारतीय उद्योगों के लिए एक सुरक्षा कवच तैयार किया है। केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि घरेलू उद्योगों, विशेष रूप से एमएसएमई (MSME) को नकदी के संकट से बचाने के लिए एक ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना’ स्थापित की गई है। यह कदम सुनिश्चित करेगा कि वैश्विक संघर्षों के कारण सप्लाई चेन या फंड में आने वाली बाधाओं के बावजूद भारतीय उद्योगों का परिचालन सुचारू रूप से चलता रहे।



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