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    इनकम टैक्स रूल्स 2026: 1 अप्रैल से बदल जाएगा टैक्स सिस्टम; जानें नए नियम

    इनकम टैक्स रूल 2026 इनकम टैक्स रूल 2026
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    नई दिल्ली|BDC News|bhopalonline.org

    आयकर विभाग द्वारा हाल ही में ‘इनकम टैक्स रूल्स, 2026’ का नया ड्राफ्ट पेश किया गया है, जिसका उद्देश्य दशकों पुराने टैक्स सिस्टम में क्रांतिकारी बदलाव लाना है। ये नए नियम आगामी 1 अप्रैल 2026 से देशभर में लागू होंगे। इस बदलाव का मुख्य ध्येय टैक्स फाइलिंग की प्रक्रिया को अत्यधिक सरल बनाना और आम करदाताओं के लिए कानूनी पेचीदगियों को कम करना है। सरकार ने इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए नियमों और फॉर्म की संख्या में भारी कटौती की है। जहाँ 1962 के पुराने नियमों में 511 नियम और 399 फॉर्म थे, वहीं नए ड्राफ्ट में इन्हें घटाकर अब मात्र 333 नियम और 190 फॉर्म तक सीमित कर दिया गया है।

    ‘यूजर-फ्रेंडली’ भाषा में डिजाइन

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की घोषणा के अनुरूप, नए फॉर्म को आम आदमी की समझ के हिसाब से ‘यूजर-फ्रेंडली’ भाषा में दोबारा डिजाइन किया गया है। विभाग ने उन प्रावधानों को पूरी तरह हटा दिया है जो अब प्रासंगिक नहीं थे, जबकि मिलते-जुलते नियमों का विलय कर दिया गया है। वर्तमान में CBDT ने इस ड्राफ्ट को सार्वजनिक सुझावों के लिए ओपन रखा है, जहाँ लोग 22 फरवरी 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं। सुझावों के विश्लेषण के बाद ही अंतिम नियमों को आधिकारिक रूप से नोटिफाई किया जाएगा।

    ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’

    प्रस्तावित इनकम टैक्स बिल में कई महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव किए गए हैं। अब ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह केवल ‘टैक्स ईयर’ शब्द का प्रयोग होगा और बिल के पन्नों को 823 से घटाकर 622 कर दिया गया है। हालाँकि, अनुभागों (सेक्शंस) की संख्या 298 से बढ़ाकर 536 और शेड्यूल्स 14 से बढ़ाकर 16 कर दिए गए हैं। डिजिटल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए क्रिप्टो एसेट्स को अब ‘अनडिस्क्लोज्ड इनकम’ (अघोषित आय) की श्रेणी में रखा गया है, ठीक वैसे ही जैसे नकदी और आभूषणों को गिना जाता है।

    बिल में ‘टैक्सपेयर्स चार्टर’

    करदाताओं की सुरक्षा के लिए इस बिल में ‘टैक्सपेयर्स चार्टर’ को शामिल किया गया है, जो उनके अधिकारों की रक्षा करेगा और कर प्रशासन में पारदर्शिता लाएगा। साथ ही, नौकरीपेशा लोगों के लिए राहत की बात यह है कि स्टैंडर्ड डिडक्शन, ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट जैसे सैलरी कटौतियों को अब एक ही स्थान पर सूचीबद्ध कर दिया गया है। पुरानी जटिल व्याख्याओं को हटाकर इसे इतना सरल बनाया गया है कि एक सामान्य नागरिक भी अपनी टैक्स देनदारी को आसानी से समझ सके।


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