सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा: ‘यातायात नियमों का पालन कानून नहीं, जीवन का सवाल’

सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा प्रशिक्षण सह कार्यशाला सड़क सुरक्षा–जीवन रक्षा प्रशिक्षण सह कार्यशाला

भोपाल | BDC News|bhopalonline.org

राजधानी भोपाल में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और नागरिकों को यातायात के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक विशेष ‘प्रशिक्षण सह कार्यशाला’ का सफल आयोजन किया गया। नगरीय विकास एवं आवास आयुक्त साकेत भोंडवे ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि सड़क सुरक्षा महज कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर दिया कि आपात स्थिति में सही जानकारी और नियमों का पालन कर अनगिनत जान बचाई जा सकती है।

युवाओं की सुरक्षा पर विशेष जोर

पुलिस आयुक्त हरिनारायण चारी मिश्रा ने कार्यशाला में चिंताजनक आंकड़े साझा करते हुए बताया कि सड़क हादसों में जान गंवाने वाले अधिकांश लोग 25 से 50 वर्ष के आयु वर्ग के होते हैं। उन्होंने युवाओं से अपील की कि हेलमेट और सीट बेल्ट को बोझ न समझें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही पूरे परिवार के लिए जीवनभर का दुख बन सकती है। उन्होंने वाहनों में सुरक्षा की आधुनिक तकनीकों के सही उपयोग पर भी बल दिया।

व्यवहारिक प्रशिक्षण और जागरूकता

नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने नागरिकों से यातायात नियमों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। कार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों द्वारा प्रतिभागियों को दुर्घटना स्थल पर प्राथमिक उपचार (First Aid), त्वरित सहायता और आपातकालीन सेवाओं के साथ समन्वय करने का व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समाज में एक ऐसी जिम्मेदार नागरिक भावना विकसित करना है, जिससे सुरक्षित यातायात का वातावरण निर्मित हो सके।


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