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    आयुर्वेद में AI का दम: AIIA और CAYET के बीच हुआ MOU, बदलेगा इलाज का तरीका

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    नई दिल्ली (BhopalOnline | BDC News): Ayurveda AI Integration : भारतीय चिकित्सा पद्धति को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (AIIA) और CAYET के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के प्राचीन ज्ञान को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल हेल्थ के साथ मिलाना है।

    डिजिटल हेल्थ की ओर आयुर्वेद का बढ़ता कदम

    आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले सर्वोच्च संस्थान AIIA ने ‘सेंटर फॉर आयुर्वेद एजुकेशन, इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी’ (CAYET) के साथ हाथ मिलाया है। इस गठबंधन से आयुर्वेद के क्षेत्र में नए शोध, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और शिक्षा के आधुनिक ढांचे तैयार किए जाएंगे।

    समझौते पर AIIA के निदेशक प्रो. (वैद्य) पी. के. प्रजापति और CAYET के सीईओ प्रो. डॉ. अभिमन्यु कुमार ने हस्ताक्षर किए।

    AI कैसे बदलेगा आयुर्वेद का चेहरा?

    कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि भविष्य में आयुर्वेद का स्वरूप कैसा होगा। यहाँ कुछ प्रमुख बिंदु दिए गए हैं जो इस साझेदारी का आधार हैं:

    • पर्सनलाइज्ड मेडिसिन: AI और मशीन लर्निंग की मदद से व्यक्ति की ‘प्रकृति’ के आधार पर सटीक इलाज संभव होगा।
    • डेटा एनालिसिस: पारंपरिक आयुर्वेदिक डेटा का आधुनिक मशीनों से विश्लेषण कर वैश्विक स्तर पर प्रमाण (Evidence) जुटाए जाएंगे।
    • नेटवर्क फार्माकोलॉजी: आयुर्वेद की दवाओं के असर को वैज्ञानिक तरीके से पूरी दुनिया के सामने पेश किया जाएगा।
    • डिजिटल प्लेटफॉर्म: शोधार्थियों और छात्रों को एक ऐसा मंच मिलेगा जहाँ वे अपनी रिसर्च को वैश्विक समाधानों में बदल सकेंगे।

    विशेषज्ञों की राय: तकनीक और परंपरा का संगम

    AIIA के निदेशक प्रो. प्रजापति ने कहा कि CAYET की तकनीकी समझ और AIIA की क्लिनिकल विशेषज्ञता मिलकर आयुर्वेद को एक नई पहचान दिलाएगी। वहीं, प्रो. अभिमन्यु कुमार ने अपने व्याख्यान में ‘आयुर्वेद में AI के अनुप्रयोग’ पर जोर देते हुए बताया कि कैसे तकनीक के जरिए हम जटिल बीमारियों का सटीक समाधान ढूंढ सकते हैं।

    आम जनता पर क्या होगा असर?

    इस समझौते का सीधा लाभ मरीजों को मिलेगा। जब आयुर्वेद में AI का इस्तेमाल होगा, तो:

    1. इलाज अधिक सटीक और वैज्ञानिक होगा।
    2. दवाइयों के चयन में गलती की गुंजाइश कम होगी।
    3. आयुर्वेद पर लोगों का भरोसा और अधिक बढ़ेगा क्योंकि अब इसके पास ‘डिजिटल प्रूफ’ होगा।

    निष्कर्ष: आयुर्वेद का सुनहरा भविष्य

    अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान अब तक 74 राष्ट्रीय और 20 अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर हस्ताक्षर कर चुका है। तकनीक के साथ आयुर्वेद का यह तालमेल भारत को ‘हेल्थ-टेक’ की दुनिया में विश्व गुरु बनाने की ओर एक ठोस कदम है।

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