Headlines

शटर गिरने का डर… सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारी लामबंद, बनाया महासंघ

शटर गिरने का डर… सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारी लामबंद, बनाया महासंघ
👁️ 374 Views

भोपाल। रवि कुमार
BDC NEWS |
bhopalonline.org

राजधानी भोपाल के संत नगर क्षेत्र में नगर निगम की प्रस्तावित सीलिंग कार्रवाई के विरोध में स्थानीय व्यापारियों ने जबरदस्त एकजुटता दिखाई है। कपड़ा, बर्तन, किराना, सराफा, साइकिल, होटल, ब्रोकर्स एसोसिएशन, मॉर्निंग स्पोर्ट्स क्लब और हैप्पी ग्रुप सहित तमाम प्रमुख व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि एक मंच पर आए। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रशासन की इस एकतरफा कार्रवाई का मुकाबला करने के लिए सभी संगठनों को मिलाकर ‘व्यापार महासंघ’ का गठन किया जाए, ताकि व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए एक मजबूत और सामूहिक आवाज उठाई जा सके।

कानूनी सलाह और मास्टर प्लान-गुजरात मॉडल की मांग

बैठक में सुप्रीम कोर्ट और न्यायालयीन आदेशों के प्रभावों को समझने के लिए वरिष्ठ वकीलों और विशेषज्ञों से कानूनी राय लेने पर सहमति बनी। कई सामाजिक संगठन सीलिंग के दायरे में आने वाले प्रतिष्ठानों से जुड़े नियम-कायदों की प्रतियां लेकर पहुंचे, जिन्हें महासंघ के संभावित पदाधिकारियों को सौंपा गया। व्यापारियों ने दो टूक मांग की कि क्षेत्र की भौगोलिक व व्यावहारिक स्थिति को देखते हुए वर्षों से लंबित मास्टर प्लान जल्द लागू किया जाए। इसके साथ ही, गुजरात राज्य की तर्ज पर ‘मिक्स लैंड यूज’ (मिश्रित भूमि उपयोग) नीति को भोपाल में भी लागू किया जाए, ताकि आवासीय परिसरों में चल रही वैध व्यापारिक गतिविधियों को कानूनी सुरक्षा मिल सके।

विस्थापितों के इतिहास और आजीविका की सुरक्षा का मुद्दा

व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि संत नगर के सिंधी विस्थापितों को शासन के विशेष नियमों और पुनर्वास नीतियों के तहत बसाया गया था, इसलिए यहां दशकों से चल रहे व्यापार का इतिहास अलग है।

प्रमुख व्यापारियों ने अपनी बात इन शब्दों में रखी:

  • नारायण दास तोलानी : अचानक की जाने वाली सीलिंग से व्यापार पूरी तरह ठप हो जाएगा और परिवारों की आजीविका छिन जाएगी। कार्रवाई से पहले प्रशासन को व्यापारियों की समस्याओं और पुराने दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।
  • कन्हैया इसरानी : वर्षों से संचालित दुकानों को रातों-रात बंद करने के बजाय सरकार को कोई व्यावहारिक और स्थायी समाधान निकालना चाहिए। दुकान पर सिर्फ दुकानदार का नहीं, बल्कि उसके स्टाफ और कई परिवारों का चूल्हा जलता है।
  • जवाहर मूलचंदानी : शहर की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान और गुजरात मॉडल जैसी व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से अमल में लाया जाना चाहिए।
  • नरेश तोलानी : यदि समय रहते राहत नहीं मिली, तो सभी संगठन मिलकर चरणबद्ध और उग्र रणनीति तय करेंगे तथा सामूहिक रूप से इस कार्रवाई का विरोध करेंगे।

भोपाल का पूरा मामला क्या है?

यह पूरा विवाद राजधानी भोपाल में आवासीय क्षेत्रों (Residential Land) में व्यावसायिक गतिविधियों (Commercial Activities) के संचालन से जुड़ा हुआ है।

  • सुप्रीम कोर्ट का निर्देश:
    सर्वोच्च न्यायालय के कड़े निर्देशों और निगरानी के बाद भोपाल नगर निगम ने आवासीय जमीनों पर चल रही दुकानों, होटलों और कमर्शियल प्रतिष्ठानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर सीलिंग और नोटिस की कार्रवाई शुरू की है। स्टार समाचार
  • मास्टर प्लान की देरी:
    भोपाल का अंतिम मास्टर प्लान वर्ष 2005 में आया था, और नया मास्टर प्लान लंबे समय से अटका हुआ है। पर्याप्त कमर्शियल भूखंडों और जोन्स के अभाव में व्यापारियों व सिंधी विस्थापितों को मजबूरी में आवासीय परिसरों या मुख्य मार्गों पर दुकाने चलानी पड़ीं। दैनिक भास्कर
  • प्रशासनिक सख्ती और हड़कंप:
    नगर निगम द्वारा अचानक थमाए जा रहे नोटिसों और सीलिंग अभियानों से संत नगर समेत अरेरा कॉलोनी, 10 नंबर मार्केट, रचना नगर और अन्य प्रमुख व्यापारिक इलाकों के हजारों व्यापारियों में रोष और दहशत का माहौल है। हालांकि, राजनीतिक स्तर पर उच्च स्तरीय बैठकों और समितियों के गठन के बाद से व्यापारी एक स्थायी नीति की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

इस समस्या से निकलने का रास्ता क्या है?

  1. मिक्स लैंड यूज नीति का क्रियान्वयन:
    शासन को तुरंत प्रभाव से भोपाल के मुख्य व्यावसायिक मार्गों और पुराने बाजारों के लिए गुजरात मॉडल की तर्ज पर ‘मिक्स लैंड यूज’ पॉलिसी को अधिसूचित करना चाहिए, जिससे आवासीय भूखंडों पर चल रहे छोटे-मध्यम व्यापार वैध हो सकें।
  2. नया मास्टर प्लान जल्द हो जारी:
    सरकार को लंबित मास्टर प्लान 2031 को जल्द लागू करना चाहिए, जिसमें वाणिज्यिक और आवासीय क्षेत्रों का स्पष्ट और व्यावहारिक निर्धारण हो। Vardhman Constructions
  3. अंतरिम सुरक्षा नीति (Interim Policy):
    जब तक नई शहरी योजना या मास्टर प्लान पूरी तरह लागू नहीं होता, तब तक न्यायालय के दायरे में रहकर एक अंतरिम नीति या अध्यादेश लाया जाए, जिससे हजारों दुकानदारों को तत्काल सीलिंग से कानूनी सुरक्षा मिल सके।
  4. समिति की रिपोर्ट के आधार पर राहत:
    शासन द्वारा बनाई गई उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर पुराने और पारंपरिक बाजारों (विशेषकर विस्थापित क्षेत्रों जैसे संत नगर) को विशेष रियायत दी जानी चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *