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आज यानी 17 फरवरी 2026 को साल का पहला सूर्य ग्रहण लग रहा है। खगोल प्रेमियों के लिए यह एक अद्भुत घटना है क्योंकि आज आसमान में ‘रिंग ऑफ फायर’ (वलयाकार सूर्य ग्रहण) का नजारा दिखने वाला है।
यहाँ इस ग्रहण से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है:
1. भारत में सूतक काल होगा या नहीं?
धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल केवल उसी स्थान पर मान्य होता है जहाँ ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है। चूँकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा।
- आप सामान्य दिनों की तरह पूजा-पाठ, भोजन और अन्य शुभ कार्य कर सकते हैं।
- मंदिरों के कपाट भी बंद नहीं किए जाएंगे।
2. ग्रहण का समय (भारतीय समयानुसार – IST)
भले ही यह भारत में दृश्य नहीं है, लेकिन भारतीय समय के अनुसार इसकी अवधि इस प्रकार रहेगी:
- ग्रहण का आरंभ: दोपहर 3:26 बजे से
- ग्रहण का मध्य (Peak): शाम 5:42 बजे के आसपास
- ग्रहण का समापन: रात 7:57 बजे तक
- कुल अवधि: लगभग 4 घंटे 31 मिनट।
3. कहाँ दिखेगा ‘रिंग ऑफ फायर’?
यह ‘वलयाकार’ सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका में पूरी तरह दिखाई देगा। इसके अलावा दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका (चिली, अर्जेंटीना) और हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में यह आंशिक रूप से नजर आएगा।
4. क्या होता है ‘रिंग ऑफ फायर’?
वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच तो आता है, लेकिन उसकी दूरी अधिक होने के कारण वह सूर्य को पूरी तरह नहीं ढकता। इस स्थिति में सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकते हुए छल्ले या ‘अंगूठी’ की तरह दिखाई देता है, जिसे वैज्ञानिक ‘रिंग ऑफ फायर’ कहते हैं।
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