मिडिल ईस्ट महायुद्ध: 87 मासूमों की मौत, ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच अब तक क्या-क्या हुआ?

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खाड़ी देशों में बारूद की गंध और आसमान में गूँजते लड़ाकू विमानों ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की दहलीज पर खड़ा कर दिया है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका की संयुक्त सैन्य कार्रवाई और ईरान के पलटवार के बीच 87 मासूम बच्चियों की मौत की हृदयविदारक खबर सामने आई है। यह संघर्ष अब केवल सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम नागरिक इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।

संघर्ष का अब तक का घटनाक्रम (Timeline of Conflict)

  1. रक्षा मंत्री और IRGC कमांडर पर हमला: इजरायली एयरस्ट्राइक में ईरान के रक्षा मंत्री और IRGC के शीर्ष कमांडर के मारे जाने के दावों ने आग में घी का काम किया है।
  2. मानवीय क्षति: युद्ध के मैदान से आ रही सबसे दुखद खबर 87 बच्चियों की मौत की है, जो एक रिहायशी इलाके में हुई बमबारी की चपेट में आ गईं।
  3. ईरान का ‘ऑपरेशन प्रतिशोध’: अपने सैन्य नेतृत्व के नुकसान के बाद ईरान ने इजरायल पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइलें दागने की घोषणा की है।
  4. अमेरिका की सीधी एंट्री: अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है कि वे इजरायल की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। अमेरिकी युद्धपोत अब सीधे तौर पर ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर रहे हैं।
  5. इजरायल की ‘रेड लाइन’: इजरायली प्रधानमंत्री ने कहा है कि ईरान ने लक्ष्मण रेखा लांघ दी है और अब अंजाम भुगतने का वक्त आ गया है।
  6. साइबर वॉर: सैन्य हमलों के साथ-साथ दोनों देशों ने एक-दूसरे के पावर ग्रिड और संचार प्रणालियों पर बड़े साइबर हमले किए हैं।
  7. तेल की कीमतों में उछाल: युद्ध की आहट से वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 10% से अधिक बढ़ गई हैं, जिससे दुनिया भर में महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
  8. शरणार्थी संकट: लेबनान और सीरिया की सीमाओं पर लाखों लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में पलायन कर रहे हैं।
  9. परमाणु केंद्रों पर खतरा: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने ईरान के परमाणु केंद्रों पर संभावित हमलों को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है।
  10. संयुक्त राष्ट्र की विफलता: UN सुरक्षा परिषद की कई बैठकों के बावजूद युद्धविराम पर कोई सहमति नहीं बन पाई है।

यह जंग अब केवल जमीन या सत्ता की नहीं, बल्कि अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। मासूमों की मौत वैश्विक समुदाय के लिए एक बड़ा सवाल है कि क्या कूटनीति पूरी तरह फेल हो चुकी है?

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