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कटनी: तालाब में जहर मिलाकर 14 वन्यजीवों का शिकार, वन विभाग अलर्ट; तीन आरोपी गिरफ्तार

कटनी: तालाब में जहर मिलाकर 14 वन्यजीवों का शिकार, वन विभाग अलर्ट; तीन आरोपी गिरफ्तार
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कटनी। डिजिटल डेस्क
BDC NEWS|
bhopalonline.org

कटनी जिले में वन्य प्राणियों की बढ़ती संख्या के बीच उनके संरक्षण पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। विजयराघवगढ़ क्षेत्र के करौंदी-घुघरी के पास एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ शिकारियों ने तालाब में जहर मिलाकर 14 निर्दोष वन्यजीवों (चीतल और सांभर) की जान ले ली। वन विभाग ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए तीन शिकारियों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे पूछताछ की जा रही है कि क्या इस घटना के पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है।

सुरक्षा में चूक और शिकारियों का नापाक खेल

जिले में शिकारी अक्सर वन विभाग की जलस्त्रोतों के आसपास कम निगरानी का फायदा उठाते हैं। यह पहली बार नहीं है जब जिले में ऐसी बर्बरता हुई है; इससे पहले ढीमरखेड़ा वन परिक्षेत्र के एक कुंड में भी जहर मिलाकर तेंदुए सहित अन्य वन्यप्राणियों का शिकार किया गया था। अप्रैल महीने में भी ढीमरखेड़ा क्षेत्र में करंट लगाकर शिकार करने के आरोप में तीन शिकारियों को पकड़ा गया था। घटना के बाद वन विभाग ने तालाब का पानी खाली करा दिया है और अब जलस्त्रोतों की सुरक्षा व गश्त बढ़ा दी गई है।

बाघों का गढ़ बने कटनी के जंगल

कटनी के जंगलों में बाघों और तेंदुओं की लगातार उपस्थिति बनी हुई है। विशेष रूप से बड़वारा वन परिक्षेत्र के बरही के करौंदीकला, खितौली, झिरिया और कुआं बीट जैसे गांवों के जंगलों में बाघों का स्थायी ठिकाना है, जहाँ लगभग आठ बाघों का मूवमेंट रहता है। वहीं, ढीमरखेड़ा का शाहडार का घना जंगल भी वन्य प्राणियों का पसंदीदा ठिकाना है, जहाँ बाघ, तेंदुए, चीतल और मोर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। गर्मियों के दिनों में ये वन्यजीव प्यास बुझाने के लिए गांवों के पास के जलस्त्रोतों तक आते हैं, जो शिकारियों के लिए आसान निशाना बन जाते हैं।

वन अमला हुआ सतर्क: प्रशिक्षण और बढ़ी निगरानी

विजयराघवगढ़ की घटना के बाद वन विभाग पूरी तरह सतर्क हो गया है। जिला वनमंडल अधिकारी गर्वित गंगवार ने बताया कि वनरक्षकों और अधिकारियों को संवेदनशील जलस्त्रोतों पर तैनात किया गया है। शनिवार को अधिकारियों ने फील्ड अमले को पानी में जहर की जांच करने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया, ताकि गश्त के दौरान कर्मचारी जहरीले पदार्थों की पहचान कर सकें। फिलहाल, वन विभाग की टीमें बड़वारा, ढीमरखेड़ा और बांधवगढ़ की सीमा से लगे क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं।



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