गणतंत्र का महापर्व: अधिकारों की हुंकार और कर्तव्यों की पुकार
अजय तिवारी, संपादक26 जनवरी का दिन केवल एक कैलेंडर की तारीख या राष्ट्रीय अवकाश मात्र नहीं होता, बल्कि यह भारतीय लोकतन्त्र की आत्मा के पुनरावलोकन का क्षण होता है। 1950 में आज ही के दिन हमने दुनिया के सबसे व्यापक और प्रगतिशील संविधान को अंगीकार किया था। संविधान ने हमें ‘प्रजा’ से ‘नागरिक’ बनाया और…