एके तिवारी, ज्योतिषाचार्य
BDC NEWS | bhopalonline.org
28 अगस्त 2026, शुक्रवार को वर्ष का दूसरा और अंतिम चंद्र ग्रहण लगेगा। यह एक आंशिक (Partial Lunar Eclipse) चंद्र ग्रहण होगा, जो तब घटित होता है जब चंद्रमा का केवल एक भाग पृथ्वी की गहरी छाया (Umbra) में प्रवेश करता है, जबकि शेष भाग हल्की छाया (Penumbra) में रहता है। इस कारण चंद्रमा पूरी तरह लाल या काला दिखाई नहीं देता, बल्कि उसका एक हिस्सा स्पष्ट रूप से अंधकारमय नजर आता है।
सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को पृथ्वी के उस पूरे भाग से देखा जा सकता है जहां उस समय रात होती है। इसलिए इसकी दृश्यता का दायरा कहीं अधिक व्यापक होता है।
ग्रहण का समय (UTC)
28 अगस्त 2026 के चंद्र ग्रहण का क्रम इस प्रकार रहेगा—
- पेनम्ब्रा प्रारंभ (P1) : 01:23:55 UTC
- आंशिक ग्रहण प्रारंभ (U1) : 02:33:48 UTC
- ग्रहण का चरम (Greatest Eclipse) : 04:12:49 UTC
- आंशिक ग्रहण समाप्त (U4) : 05:51:55 UTC
- पेनम्ब्रा समाप्त (P4) : 07:01:41 UTC
पूरा ग्रहण लगभग 5 घंटे 38 मिनट तक चलेगा, जबकि आंशिक ग्रहण की अवधि लगभग 3 घंटे 18 मिनट रहेगी।
ग्रहण की विशेषता
इस ग्रहण का अम्ब्रल परिमाण (Umbral Magnitude) 0.9319 रहेगा। इसका अर्थ है कि ग्रहण के चरम समय में चंद्रमा का लगभग 93 प्रतिशत भाग पृथ्वी की गहरी छाया में होगा। इसलिए यह एक अत्यंत प्रभावशाली आंशिक चंद्र ग्रहण माना जाएगा।
ग्रहण के समय चंद्रमा अपनी कक्षा में अपोजी (Apogee) के निकट होगा। अपोजी वह स्थिति होती है जब चंद्रमा पृथ्वी से अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर होता है। इसी कारण उसका स्पष्ट आकार सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा दिखाई देगा।
किन क्षेत्रों में दिखाई देगा ग्रहण
यह आंशिक चंद्र ग्रहण मुख्य रूप से निम्न क्षेत्रों में दिखाई देगा—
- उत्तर अमेरिका
- दक्षिण अमेरिका
- मध्य प्रशांत महासागर
- अफ्रीका
- यूरोप
- मध्य पूर्व
कुछ स्थानों पर ग्रहण चंद्र उदय के समय दिखाई देगा, जबकि कुछ क्षेत्रों में चंद्र अस्त के समय ग्रहण देखा जा सकेगा।
ग्रहण ऋतु (Eclipse Season)
यह ग्रहण अगस्त 2026 की ग्रहण ऋतु का दूसरा और अंतिम ग्रहण होगा। इस ग्रहण ऋतु की शुरुआत 12 अगस्त 2026 को पूर्ण सूर्य ग्रहण से हुई थी। लगभग 15 दिन बाद पूर्णिमा के दिन यह आंशिक चंद्र ग्रहण घटित होगा।
सामान्यतः प्रत्येक वर्ष दो ग्रहण ऋतुएँ होती हैं और प्रत्येक ऋतु लगभग 35 दिनों तक रहती है। इसी दौरान सूर्य और चंद्र ग्रहणों की घटनाएं घटित होती हैं।
वर्ष 2026 के चार प्रमुख ग्रहण
साल 2026 में कुल चार प्रमुख ग्रहण होंगे—
- 17 फरवरी – वलयाकार सूर्य ग्रहण
- 3 मार्च – पूर्ण चंद्र ग्रहण
- 12 अगस्त – पूर्ण सूर्य ग्रहण
- 28 अगस्त – आंशिक चंद्र ग्रहण
इस प्रकार अगस्त 2026 में मात्र 16 दिनों के अंतराल पर सूर्य और चंद्र ग्रहण दोनों देखने को मिलेंगे।
सारोस चक्र में विशेष स्थान
28 अगस्त 2026 का यह ग्रहण चंद्र सारोस श्रृंखला 138 का 30वां सदस्य है। सारोस चक्र लगभग 18 वर्ष 11 दिन के अंतराल पर दोहराया जाता है और इससे जुड़े ग्रहण लगभग समान प्रकृति के होते हैं।
इस श्रृंखला की शुरुआत वर्ष 1521 में हुई थी और इसका समापन वर्ष 2982 में होगा। वर्तमान ग्रहण इस श्रृंखला के आंशिक ग्रहणों के अंतिम चरणों में शामिल है। इसके बाद 7 सितंबर 2044 से इसी श्रृंखला में पूर्ण चंद्र ग्रहणों का क्रम प्रारंभ होगा।
वैज्ञानिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह ग्रहण
वैज्ञानिकों के लिए चंद्र ग्रहण केवल एक खगोलीय घटना नहीं बल्कि पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की सटीक कक्षीय गति का अध्ययन करने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। ग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया, चंद्र सतह पर प्रकाश के व्यवहार, वातावरण के प्रभाव और चंद्रमा की कक्षा से संबंधित कई महत्वपूर्ण आंकड़े प्राप्त किए जाते हैं।
खगोल विज्ञान के विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी यह ग्रहण विशेष अध्ययन का विषय रहेगा।
ग्रहण से जुड़े प्रमुख तथ्य
- ग्रहण की तिथि: 28 अगस्त 2026 (शुक्रवार)
- ग्रहण का प्रकार: आंशिक चंद्र ग्रहण
- अम्ब्रल परिमाण: 0.9319
- सारोस श्रृंखला: 138
- श्रृंखला का सदस्य: 30
- ग्रहण का चरम समय: 04:12:49 UTC
- चंद्रमा अपोजी के निकट रहेगा।
- यह अगस्त 2026 के पूर्ण सूर्य ग्रहण के लगभग 16 दिन बाद लगेगा।
28 अगस्त 2026 का आंशिक चंद्र ग्रहण वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाओं में से एक होगा। यह ग्रहण न केवल खगोल विज्ञान के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि ग्रहण चक्र, सारोस श्रृंखला और पृथ्वी-चंद्रमा की कक्षीय गति को समझने का भी उत्कृष्ट अवसर प्रदान करेगा। चंद्रमा का लगभग पूरा भाग पृथ्वी की छाया में आने के कारण यह दृश्य अत्यंत आकर्षक रहेगा और दुनिया के अनेक देशों में इसे आसानी से देखा जा सकेगा।