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MP स्कूल शिक्षा विभाग: 1 जुलाई से अधिकारी-कर्मचारियों के लिए भी ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य

MP स्कूल शिक्षा विभाग: 1 जुलाई से अधिकारी-कर्मचारियों के लिए भी ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य
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भोपाल. डिजिटल डेस्क
BDC NEWS| bhopalonline.org

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग ने अपनी कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब तक केवल शिक्षकों के लिए अनिवार्य ई-अटेंडेंस (E-Attendance) व्यवस्था को अब विभाग के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भी अनिवार्य कर दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह ने इस संबंध में आधिकारिक निर्देश जारी कर दिए हैं, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी होंगे।

‘हमारे शिक्षक’ एप के जरिए दर्ज होगी उपस्थिति

जारी आदेश के अनुसार, विभाग के सभी स्तरों पर कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी ‘हमारे शिक्षक’ एप के माध्यम से अपनी डिजिटल उपस्थिति दर्ज करेंगे। ऑनलाइन हाजिरी के साथ-साथ, अब कर्मचारियों के लिए अपने अवकाश (Leave) संबंधी जानकारी को भी इसी ऑनलाइन प्रणाली में अपडेट करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह व्यवस्था विभागीय पारदर्शिता को बढ़ाने और उपस्थिति की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है।

इन कार्यालयों में लागू होगा नया नियम

यह ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था स्कूल शिक्षा विभाग के सभी कार्यालयों में समान रूप से लागू की जाएगी। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यालय शामिल हैं:

  • लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और राज्य शिक्षा केंद्र।
  • जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय और जिला शिक्षा केंद्र।
  • विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी प्रशिक्षण संस्थान।

कार्यालय प्रमुखों की तय की गई जवाबदेही

DPI ने इस व्यवस्था के सुचारू कार्यान्वयन के लिए संबंधित कार्यालय और संस्थान प्रमुखों को जिम्मेदारी सौंपी है। प्रमुखों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके अधीन कार्यरत प्रत्येक कर्मचारी निर्धारित प्रक्रिया का पालन करे। यदि नियमों के पालन में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी संबंधित कार्यालय प्रमुख की होगी।

शिक्षक संगठनों ने सराहा निर्णय

राज्य के शिक्षक संगठनों ने विभाग के इस फैसले का स्वागत किया है। शासकीय शिक्षक संगठन के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कौशल ने बताया कि संगठन काफी समय से यह मांग कर रहा था कि ई-अटेंडेंस व्यवस्था केवल शिक्षकों तक सीमित न रहकर विभाग के हर स्तर पर लागू होनी चाहिए। उनका मानना है कि इस कदम से न केवल विभागीय कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि सभी स्तरों पर जवाबदेही भी तय हो सकेगी।

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