मुंबई:
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भारतीय शेयर बाजार के इतिहास में एक और बड़ा कॉर्पोरेट फ्रॉड का मामला सामने आया है। दिग्गज गोल्ड रिफाइनर कंपनी राजेश एक्सपोर्ट्स (Rajesh Exports) और उसके प्रमोटर राजेश मेहता के खिलाफ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने एक कड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। इस खबर के आते ही कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई और निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है।
शेयर बाजार में हड़कंप: 5% के लोअर सर्किट पर लॉक हुआ स्टॉक
गुरुवार को बाजार खुलते ही राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर कंपनी का शेयर 4.99 फीसदी की गिरावट के साथ 104.65 रुपये पर आ गया और लोअर सर्किट पर लॉक हो गया। बाजार में स्थिति यह थी कि काउंटर पर सिर्फ बिकवाल (Sellers) ही नजर आ रहे थे, जबकि खरीदारों (Buyers) का पूरी तरह से टोटा रहा।
SEBI ने क्यों की इतनी बड़ी कार्रवाई? जानें मुख्य कारण
सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा जारी अंतरिम आदेश में कंपनी के कामकाज और वित्तीय लेखा-जोखा (Financial Statements) को लेकर बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए गए हैं।
- 99% तक रेवेन्यू फर्जी होने का शक: सेबी की शुरुआती जांच में ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं जो इशारा करते हैं कि राजेश एक्सपोर्ट्स का लगभग 97% से 99% तक का घोषित रेवेन्यू पूरी तरह से बढ़ा-चढ़ाकर (Window Dressing) दिखाया गया था।
- इतिहास की अनसुनी घटना: नियामक ने अपने आदेश में इस वित्तीय गड़बड़ी को “अत्यंत गंभीर और बाजार के इतिहास में अनसुनी” घटना करार दिया है।
- प्रमोटर पर कड़ा प्रतिबंध: निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए सेबी ने तत्काल कदम उठाते हुए प्रमोटर राजेश मेहता पर कंपनी के शेयरों को खरीदने, बेचने या किसी भी तरह का व्यापार (Trading) करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है।
फॉरेंसिक ऑडिट में बाधा डालने और फंड डाइवर्ट करने का आरोप
यह पूरा मामला मार्च 2024 में मिली एक शेयरधारक (Shareholder) की शिकायत के बाद शुरू हुआ था। शिकायत में कंपनी की किताबों में दर्ज भारी-भरकम ‘ट्रेड रिसीवेबल्स’ (Trade Receivables) पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद सेबी ने अप्रैल 2020 से मार्च 2024 के बीच की अवधि के लिए जांच शुरू की और ‘BDO इंडिया सर्विसेज’ को फॉरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया था।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, राजेश एक्सपोर्ट्स के प्रबंधन ने फॉरेंसिक ऑडिटर्स के साथ बिल्कुल सहयोग नहीं किया:
- रिकॉर्ड छिपाने का आरोप: प्रबंधन ने मुख्य अकाउंटिंग सिस्टम, वित्तीय रिकॉर्ड और सहायक दस्तावेजों का एक्सेस देने से बार-बार इनकार किया, जिससे बड़े लेनदेन की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी।
- विदेशी खातों में हेरफेर: सिंगापुर और स्विट्जरलैंड में मौजूद कंपनी की विदेशी सहायक कंपनियों (Subsidiaries) के खातों की समीक्षा में पाया गया कि पैसों को इस तरह घुमाया गया (Round Tripping) था, जिससे उनके मूल स्रोत और गंतव्य को छुपाया जा सके।
देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC को लगा बड़ा झटका
राजेश एक्सपोर्ट्स के इस बड़े कॉर्पोरेट फ्रॉड की आंच देश की सबसे बड़ी संस्थागत निवेशक लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (LIC) तक भी पहुंच गई है।
दरअसल, एलआईसी के पास राजेश एक्सपोर्ट्स में करीब 10 फीसदी की बड़ी हिस्सेदारी है। इस लोअर सर्किट के कारण एलआईसी के निवेश पोर्टफोलियो को भारी नुकसान पहुंचा है, जिसके चलते गुरुवार को एलआईसी के अपने शेयरों में भी करीब 1% की गिरावट देखी गई।
आगे क्या? SEBI ने दिया 30 दिनों का अल्टीमेटम
सेबी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए राजेश एक्सपोर्ट्स को सभी लंबित और जरूरी जानकारियां सौंपने के लिए 30 दिनों का समय दिया है। इसके साथ ही, पूरे मामले की तह तक जाने और विस्तृत जांच के लिए एक नए फॉरेंसिक ऑडिटर की नियुक्ति का आदेश भी जारी कर दिया गया है।
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