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गुनाह का जाल: जब हुस्न और रसूख के कॉकटेल ने हिला दिया पूरा सिस्टम

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इंदौर।
BDC News | bhopalonline.org

यह कहानी सियासत, शराब, रसूख और हुस्न के उस खौफनाक जाल की है, जिसने मध्य प्रदेश के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर को अपने जाल में फंसाने वाले इस ‘हनी ट्रैप’ कांड में इंदौर पुलिस ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है. सागर से बुधवार को एक ऐसी महिला को हिरासत में लिया गया है, जिसे इस पूरे ब्लैकमेलिंग सिंडिकेट की सबसे ‘मजबूत कड़ी’ माना जा रहा है.

गिरफ्तार हुई इस नई किरदार का नाम है रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी, जो कभी सत्ताधारी दल भाजपा के एक प्रकोष्ठ में पदाधिकारी के तौर पर रसूख रखती थी.

जेल की वैन और कोर्ट की पेशी: जहां बुना गया ब्लैकमेलिंग का ताना-बाना

इस गैंग के काम करने का तरीका किसी फिल्मी थ्रिलर जैसा था. पुलिस सूत्रों की मानें तो इस खौफनाक साजिश की बुनियाद कहीं और नहीं, बल्कि जेल की चारदीवारी और कोर्ट की पेशियों के दौरान रखी गई थी.

  • मामले की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन की मुलाकात जेल में महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित से हुई थी.
  • जब कोर्ट में पेशी के लिए ले जाया जाता, तो श्वेता इसी दौरान रेशू को साथ लेकर अलका से मिलने पहुंच जाती थी.
  • पेशी के इसी समय का फायदा उठाकर इस तिकड़ी ने रसूखदारों को कंगाल बनाने का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया.
  • रेशू ने अलका को भरोसा दिलाया था कि उसके पास बड़े-बड़े नेताओं, फाइनेंसरों, शराब कारोबारियों और रसूखदार अफसरों की पूरी लिस्ट है, जिन्हें जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये ऐंठे जा सकते हैं.

“तुम्हारे आका भी हमारी जेब में हैं” – जब अलका ने दिखाया वीडियो

क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजेश त्रिपाठी के मुताबिक, रेशू ने श्वेता विजय जैन के जरिए ही इंदौर की अलका दीक्षित से हाथ मिलाया था और इसके बाद शुरू हुआ प्रभावशाली लोगों को शिकार बनाने का खेल.

इस सिंडिकेट के हौसले कितने बुलंद थे, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जब इस गैंग ने शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर को जाल में फंसाकर ब्लैकमेल करना शुरू किया, तो चिंटू ने अपने ऊंचे संपर्कों और पहुंच का हवाला दिया. इस पर अलका दीक्षित बिल्कुल नहीं डरी, बल्कि उसने पलटवार करते हुए चिंटू को कुछ बेहद आपत्तिजनक ‘हनी ट्रैप’ वीडियो दिखाए और कहा—“जिन बड़े आकाओं के नाम तुम ले रहे हो ना, उनके ये वीडियो देखो, वो सब भी हमारे पास हैं.”

जांच में यह भी साफ हुआ है कि इस गैंग ने निमाड़ क्षेत्र के एक बेहद कद्दावर नेता को भी अपना शिकार बनाया था, जिनका इंदौर वाला बंगला अलका दीक्षित के ही इलाके में मौजूद है.

पुलिस महकमे का ‘भेदी’ और डिजिटल सबूतों की तलाश

इस हाई-प्रोफाइल मामले में सिर्फ बाहरी लोग ही नहीं, बल्कि कानून के रखवाले भी शामिल थे. क्राइम ब्रांच ने इस मामले में श्वेता, अलका, उसके बेटे जयदीप और प्रॉपर्टी डीलर लाखन चौधरी के साथ-साथ पुलिस महकमे के ही हेड कॉन्स्टेबल विनोद शर्मा को भी दबोचा है. विनोद शर्मा से देर रात तक हुई कड़ी पूछताछ में अलका दीक्षित के साथ उसके सीधे और गहरे कनेक्शन के सुराग मिले हैं.

अब इंदौर पुलिस की सबसे बड़ी प्राथमिकता उस डिजिटल बारूद को जब्त करना है, जो अगर सामने आया तो कई बड़े चेहरों को बेनकाब कर देगा. पुलिस रेशू और अलका के पास मौजूद कथित वीडियो, ऑडियो और अन्य डिजिटल सबूतों को रिकवर करने में जुटी है. आरोपियों के मोबाइल से कुछ अहम फाइलें ऑलरेडी पुलिस के हाथ लग चुकी हैं.

मास्टरमाइंड के बदले सुर: बनना चाहती है ‘सरकारी गवाह’

जैसे ही कानून का शिकंजा कसा, इस सिंडिकेट की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन के सुर बदल गए हैं. रिमांड के दौरान श्वेता ने पुलिस के सामने कबूल किया कि अलका और रेशू दोनों लगातार उसके टच में थीं. श्वेता का दावा है कि उसने अलका को आगाह भी किया था कि जिन लोगों पर वो हाथ डाल रही है, वे बहुत रसूखदार हैं और अंजाम बुरा हो सकता है, लेकिन अलका नहीं मानी.

अब खुद को फंसता देख श्वेता विजय जैन ने पुलिस के सामने सबसे बड़ा दांव खेला है—उसने अदालत में ‘सरकारी गवाह’ बनने की इच्छा जताई है, ताकि वह इस पूरे राज से पर्दा उठा सके और खुद की सजा कम करा सके.

कहानी का एक और पहलू: दिलचस्प बात यह है कि इस पूरी साजिश का शिकार बना शराब कारोबारी चिंटू ठाकुर खुद दूध का धुला नहीं है, वह पहले से ही इंदौर के आजाद नगर थाने में ‘हत्या के प्रयास’ (अटेंप्ट टू मर्डर) के एक मामले में नामजद आरोपी है. वहीं, इस पूरे मामले में एक हैरान करने वाली बात यह भी रही कि ब्लैकमेलिंग की लिखित शिकायत मिलने के पूरे 19 दिन बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की, जो इस केस में रसूखदारों के दबाव की तरफ इशारा करती है.


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