हिरदाराम नगर.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से ईंधन बचाने और प्रदूषण कम करने के लिए ‘कारपूल’ अपनाने की अपील की गई है। हालांकि, भोपाल के सेवा सदन नेत्र चिकित्सालय के सात डॉक्टरों ने इस विजन को प्रधानमंत्री की अपील से बहुत पहले ही हकीकत में बदल दिया था। जून 2022 से ही यह समूह व्यक्तिगत वाहनों के बजाय एक ही कार में अस्पताल आने-जाने की पद्धति का पालन कर रहा है। सीनियर नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सपना प्रशांत श्रीवास्तव के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए उन्होंने यह फैसला लिया था, जिससे अब हर महीने सैकड़ों लीटर ईंधन की बचत हो रही है
एक कार और सात डॉक्टर: पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ी टीम बॉन्डिंग
इस पहल के माध्यम से ये डॉक्टर न केवल कार्बन उत्सर्जन कम कर रहे हैं, बल्कि अस्पताल परिसर में पार्किंग की समस्या को भी कम करने में मदद कर रहे हैं। प्रतिदिन सात कारों के स्थान पर केवल एक कार के आने से मरीजों को पार्किंग में सहूलियत मिलती है। ईंधन की बचत और पर्यावरण रक्षा के अलावा, इस साझा यात्रा का सबसे बड़ा फायदा डॉक्टरों के बीच आपसी समन्वय और चर्चा के रूप में सामने आया है। आने-जाने के लगभग 40 मिनट के दौरान ये विशेषज्ञ न केवल जटिल मेडिकल केसेज पर चर्चा करते हैं, बल्कि अपने व्यक्तिगत सुख-दुख भी साझा करते हैं, जिससे उनकी टीम बॉन्डिंग और अधिक मजबूत हुई है।
इन डॉक्टरों की टोली बनी समाज के लिए प्रेरणा
सेवा सदन अस्पताल प्रबंधन के पूर्ण सहयोग से संचालित इस मुहिम में डॉ. प्रेरणा उपाध्याय, डॉ. रश्मि आप्टे, डॉ. सपना प्रशांत श्रीवास्तव, डॉ. रोहिणी गद्रे, डॉ. दीपा रैदास, डॉ. सरिता कुमार और डॉ. सोनल गोरे शामिल हैं। इन डॉक्टरों के साथ ड्राइवर चंदन भी इस अनुकरणीय यात्रा का हिस्सा हैं। डॉ. श्रीवास्तव का कहना है कि जब उन्होंने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री को कारपूलिंग पर जोर देते सुना, तो उन्हें गर्व महसूस हुआ कि उनकी वर्षों पुरानी यह छोटी सी कोशिश आज एक राष्ट्रीय सोच का हिस्सा बन चुकी है। इन सात डॉक्टरों ने सिद्ध कर दिया है कि यदि व्यक्ति स्वयं से शुरुआत करे, तो समाज में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।