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‘दाना-पानी’ सत्र: सिद्धभाऊ ने सिखाए बच्चों को दया और करुणा के संस्कार

नवनिध में दाना-पानी सत्र. AI नवनिध में दाना-पानी सत्र. AI

संदेश: पक्षियों की सेवा से विकसित होंगे मानवीय मूल्य

संत हिरदाराम नगर|BDC News| bhopalonline.org

दया और करुणा के बीज बोने के लिए ‘दाना-पानी’ एक सशक्त माध्यम है। प्रतिदिन पक्षियों के लिए दाना डालना और जल की व्यवस्था करना केवल एक कार्य नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील बनाने की एक प्रक्रिया है। यह बात शहीद हेमू कालाणी एजुकेशन सोसायटी के अध्यक्ष सिद्धभाऊ ने कही। वे नवनिध स्कूल में आयोजित अभिभावक संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, जब बच्चा किसी मूक प्राणी की प्यास बुझाता है, तो उसमें जिम्मेदारी और निस्वार्थ सेवा का भाव स्वतः जागृत होता है।

संस्कारित पालन-पोषण: भय नहीं, स्नेह है आधार

अभिभावकों से बात करते हुए भाऊ ने मनोवैज्ञानिक पहलू पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि अनुशासन के नाम पर बच्चों को डाँटना या डराना उनके विकास में बाधक बन सकता है। भयभीत बच्चा अक्सर सच बोलने से कतराता है, इसलिए घर में ऐसा सकारात्मक वातावरण होना चाहिए जहाँ बच्चा निडर होकर अपनी बात कह सके। उन्होंने माता-पिता से आग्रह किया कि वे अपनी भाषा में मधुरता लाएं और स्वयं श्रेष्ठ व्यवहार प्रस्तुत करें, क्योंकि बच्चे उपदेशों से नहीं, बल्कि अपने बड़ों के आचरण से सीखते हैं।

‘दाना-पानी’ सत्र का प्रतीक: करुणा की भेंट

कार्यक्रम के समापन पर विद्यालय प्रबंधन ने एक अनूठी पहल की। सभी उपस्थित अभिभावकों को मिट्टी के दो सकोरे और पक्षियों के लिए ज्वार (दाना) भेंट किए गए। यह भेंट इस संकल्प का प्रतीक थी कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्राओं को एक बेहतर और संवेदनशील इंसान बनाने की यात्रा है। प्राथमिक विभाग की कोऑर्डिनेटर रीटा आहूजा ने भी स्पष्ट किया कि यह छोटी सी आदत बच्चों में समय प्रबंधन और नियमितता जैसे गुणों को समाहित करने में सहायक सिद्ध होगी। कार्यक्रम में सोसायटी के सचिव घनश्याम बूलचंदानी ने भी विचार रखे।

रिपोर्ट: रवि नाथानी

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