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    यदि है स्वास्थ्य की चाह तो चलो प्रकृति की राह : भाऊजी

    यदि है स्वास्थ्य की चाह तो चलो प्रकृति की राह : भाऊजी
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    आरोग्य केन्द्र के रोग निवारण शिविर में अनुभव सत्र


    हिरदाराम नगर। भोपाल डॉट कॉम
    सबसे पहले बीमारी हमारे मन में पैदा होती है, बाद में शरीर में। मन स्वस्थ रहेगा तो आप कभी भी बीमार नहीं रहेंगे। शरीर व मस्तिष्क एक साधन है, यदि ये स्वस्थ व सुदृढ़ हैं तो आजीविका चलाने के लिए जो कुछ भी करना पड़ता है वो करेंगे। यह बात आरोग्य केन्द्र के रोग निवारण एवं प्रशिक्षण शिविर के अनुभव सत्र में सिद्धभाऊजी ने कही। आरोग्य केन्द्र में मंगलवार को शिविर का समापन होगा।
    भाऊजी ने कहा कि बीमार व्यक्ति कुछ भी नहीं कर पाएगा, इसलिए जीवन में कुछ भी करना है तो स्वस्थ रखना बहुत जरूरी क्योंकि बीमार व्यक्ति को किसी भी चीज में आनंद नहीं आता हैं। आनंद मेला प्राकृतिक चिकित्सा का महत्वपूर्ण अंग हैं वह सिर्फ आनंद मेला नहीं हे जब हमारा मन आनंद में व खुश हैं तो हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता हैं। सत्र की शुरूआत में प्राकृतिक चिकित्सा केन्द्र के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुलाब रॉय टेवानी ने शिविर का ब्योरा दिया। टेवानी ने कहा कि दिनचर्या को व्यवस्थित कर हम सेहतमंद रह सकते हैं।
    विदेश से भी आए साधक
    बता दे शिविर में स्वस्थ रहने के गुर सीखने के लिए मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब, बिहार, उत्तरप्रदेश और कैलिफोर्निया साधक संतनगर आए हैं। अनुभव सत्र में शिविरार्थियों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि उन्हें दस दिनों में ही बी.पी., डायबीटिज, घुटनों के दर्द, हाथां पैरों के दर्द, अर्थराइटिस, साइनस, सरवाइकल स्पोंडिलाइटिस में आराम हुआ है।
    यह हुईं गतिविधियां
    प्रातः जागरण एवं नित्यकर्म, नियमित योगाभ्यास, यौगिक क्रियाएँ, प्रातः कालीन व सायंकालीन व्याख्यान सत्र एवं शंका समाधान, प्राकृतिक चिकित्सा, प्राकृतिक आहार, ध्यानात्मक क्रियाएँ एवं आनंद मेला।

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