योनि कूट क्या है? विवाह मिलान में योनि कूट की पूरी गाइड — Compatibility, गुण, तालमेल और असर
भारत में विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं बल्कि दो संस्कृतियों, भावनाओं और भविष्य का संगम होता है। इसलिए शादी से पहले कुंडली मिलान को बेहद महत्वपूर्ण माना गया है। अष्टकूट मिलान में कुल 8 कूट होते हैं जिनमें से आज हम बात करेंगे — योनि कूट की। बहुत से लोग इसके नाम से ही भ्रमित हो जाते हैं जबकि शास्त्रों के अनुसार योनि कूट पति-पत्नी के स्वभाव, आकर्षण, अंतरंग सामंजस्य और मानसिक मेल का संकेतक है।
जैसा कि बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में उल्लेख मिलता है—
“योनि सम्यक् विवाहे सुखम्, विपरीते तु कलहो भवेत्”
अर्थात — योनि मेल हो तो वैवाहिक जीवन सुखद, अन्यथा कलह और मतभेद उत्पन्न हो सकते हैं।
तो आइए सरल भाषा में समझते हैं योनि कूट क्या है? कैसे मैच होता है? इसके कितने गुण मिलते हैं? और विवाह पर इसका प्रभाव कितना गहरा है।
योनि कूट क्या है? (Basic Definition)
योनि कूट अष्टकूट मिलान का पाँचवाँ कूट है और यह नक्षत्र आधारित वर्गीकरण पर काम करता है। इसमें 14 प्रकार की योनियाँ मानी गई हैं। प्रत्येक नावकों को पशु-प्रवृत्ति के अनुसार वर्गीकृत किया गया है।
यह मापता है —
- स्वभाव की समानता
- आकर्षण स्तर (Compatibility)
- यौन-सामंजस्य (शास्त्र संदर्भ अनुसार)
- मानसिक मेल और समझ
- दांपत्य में प्रेम व मधुरता
यानी सरल शब्दों में योनि कूट दंपत्ति के बीच घनिष्ठ तालमेल और दांपत्य सुख का सूचक है।
योनि कूट में कुल कितने गुण मिलते हैं?
- योनि कूट के कुल 4 गुण होते हैं
- पूरी तरह मेल हो → 4 गुण
- आंशिक मेल → 2 या 3 गुण
- विपरीत या शत्रु योनि हो → 0 गुण
👉 इसलिए विवाह में कम-से-कम 2+ गुण मिलना शुभ माना जाता है।
योनि कूट में कुल 14 योनियाँ कौन-सी हैं?
| योनि | संबंधित नक्षत्र |
|---|---|
| अश्व (घोड़ा) | अश्विनी, शतभिषा |
| गज (हाथी) | भरणी, रेवती |
| मृग (हिरण) | कृत्तिका, धनिष्ठा |
| मेष (भेड़) | रोहिणी, मृगशिरा |
| सर्प (साँप) | आर्द्रा, चित्रा |
| श्वान (कुत्ता) | पुनर्वसु, पुष्य |
| मार्जार (बिल्ली) | आश्लेषा, पूर्वाफाल्गुनी |
| व्याघ्र (बाघ) | उत्तराफाल्गुनी |
| मृग (हिरण) | उत्तरा भाद्रपदा |
| वानर | पूर्वाषाढ़ा |
| सिंह | उत्तराषाढ़ा |
| मृग | श्रवण |
| महिष (भैंस) | पूर्वाभाद्रपदा |
| नारी वर्ग भेद सहित योग |
(ध्यान दें — विभिन्न ज्योतिष ग्रंथों में नाम सूची में थोड़ा अंतर मिल सकता है।)
योनि कूट कैसे मैच किया जाता है?
गणना नक्षत्र आधारित है। यदि दंपत्ति की योनियाँ—
समान हों → उत्तम फल
- स्वभाव मेल
- मानसिक व शारीरिक तालमेल
- प्रेम स्थिर रहता है
मित्र योनि → अच्छा मेल
- साझेदारी ठीक रहती है
- मतभेद कम
शत्रु योनि → अशुभ मानी गई
- तकरार व ईगो क्लैश
- मानसिक दूरी
- कम आकर्षण
इसलिए 4 में से 0 गुण मिलने पर योनि दोष माना जा सकता है।
शादी से पहले कुंडली मिलान: जानिए क्यों ज़रूरी?
योनि कूट क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
क्योंकि यह दर्शाता है—
1. स्वभाव Compatibility
क्या दोनों का नेचर मिल पाएगा या टकराव होगा?
2. आकर्षण और संबंधों की गर्माहट
दंपत्ति में mutual attraction व bonding कैसी रहेगी?
3. दांपत्य सुख व स्थिरता
शादी केवल सामाजिक नहीं — भावनात्मक व मानसिक जुड़ाव भी महत्वपूर्ण है।
4. अंतरंग सामंजस्य
शास्त्रों के अनुसार दांपत्य संबंध में सुख-शांति का आधार।
शास्त्रीय संदर्भ
योनि कूट का वर्णन प्रमुख रूप से निम्न ग्रंथों में मिलता है—
- बृहत् पाराशर होरा शास्त्र
- जैमिनी सूत्र
- अष्टकूट विवेचन (पाराशर ज्योतिष मत)
- गरुड़ पुराण विवाह अध्याय
इन ग्रंथों में स्पष्ट कहा गया है कि योनि कूट का सही मेल वैवाहिक सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
FAQ — योनि कूट से जुड़े आम प्रश्न
Q1. क्या योनि कूट खराब होने से विवाह नहीं करना चाहिए?
नहीं। केवल इस आधार पर निर्णय गलत होगा। पूरी कुंडली सहित 36 गुण, ग्रह स्थिति, सप्तम भाव व नवांश भी देखें।
Q2. कितने गुण मिलने चाहिए?
4 में से कम से कम 2-4 गुण अच्छे माने गए हैं।
Q3. क्या योनि दोष का निवारण संभव है?
हाँ, शांति-पाठ, मंत्र जाप व योग्य ज्योतिष सलाह से उपाय संभव।
Q4. क्या Love Marriage में भी योनि कूट देखा जाता है?
हाँ। Compatibility चेक करने का अच्छा तरीका है।
Conclusion
योनि कूट दंपत्ति के आकर्षण, स्वभाव तालमेल और दांपत्य सुख को दर्शाने वाला महत्वपूर्ण कूट है। यदि यह अच्छे गुण देता है तो विवाह पश्चात प्रेम, विश्वास और जीवन की लय सहज रूप से चलती है। परंतु निर्णय केवल एक कूट के आधार पर नहीं – पूरी कुंडली व ग्रह बल देखकर ही अंतिम रूप से विवाह तय करें।