विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो विचार, दो परिवार और दो जीवन ऊर्जा का संगम है। भारतीय वैदिक ज्योतिष में शादी से पहले कुंडली मिलान इसीलिए किया जाता है ताकि दांपत्य जीवन सुखद, संतुलित और compatible रहे।
अष्टकूट मिलान में कुल 36 गुण होते हैं, जिनमें सबसे अधिक महत्व रखने वाला कूट है नाड़ी कूट (Nadi Koot) — यह 8 अंक तक देता है। Marriage Compatibility में Highest Weight इसी कूट को मिला है।
कहावत है —
“नाड़ी नहीं मिले तो शादी नहीं”,
लेकिन क्या यह सच में इतना निर्णायक है? और यदि नाड़ी दोष हो जाए तो क्या उपाय हैं? आइए विस्तार से समझते हैं।
नाड़ी कूट क्या है? (What is Nadi Koot)
नाड़ी कूट जन्म समय पर आधारित चंद्र नक्षत्र से निर्धारित होता है।
वैदिक शास्त्रों के अनुसार मनुष्य की कुल 3 नाड़ियाँ मानी गई हैं —
इन नाड़ियों से स्वभाव, प्रकृति, स्वास्थ्य, फर्टिलिटी और वैवाहिक सामंजस्य को परखा जाता है।
संदर्भ: बृहत पाराशर होरा शास्त्र में नाड़ी को विवाह के लिए अतिआवश्यक गुण बताया गया है।
नाड़ी का वर्गीकरण कैसे होता है?
प्रत्येक नाड़ी में 9-9 नक्षत्र आते हैं।
| नाड़ी | नक्षत्र |
|---|---|
| आदी नाड़ी | अश्विनी, मघा, मूल, भरणी, पूर्वाफाल्गुनी, पूर्वाषाढ़ा, कृत्तिका, उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़ा |
| मध्य नाड़ी | रोहिणी, हस्त, श्रवण, मृगशिरा, चित्रा, धनिष्ठा, आर्द्रा, स्वाती, शतभिषा |
| अन्त्य नाड़ी | पुनर्वसु, विशाखा, उत्तराभाद्रपद, पुष्य, अनूराधा, रेवती, आश्लेषा, ज्येष्ठा, पूर्वाभाद्रपद |
Rule: यदि दूल्हा–दुल्हन एक ही नाड़ी के हों, तो नाड़ी दोष माना जाता है।
नाड़ी कूट में अंक कैसे मिलते हैं?
अष्टकूट मिलान में Nadi सर्वाधिक अंक वाला कूट है — 8 Points!
| मेल | अंक |
|---|---|
| अलग-अलग नाड़ी | 8/8 |
| समान नाड़ी (Nadi Dosha) | 0 |
इसलिए विवाह में नाड़ी मैच होना बेहद शुभ माना जाता है।
नाड़ी दोष क्या है और इसका प्रभाव?
जब दोनों की नाड़ी एक ही हो – आदी-आदी, मध्य-मध्य या अन्त्य-अन्त्य —
तो Nadi Dosha बनता है।
संभावित प्रभाव —
- संतान प्राप्ति में बाधा
- शारीरिक/ऊर्जा असंतुलन
- संबंधों में ठंडापन
- भावनात्मक दूरी
- दांपत्य जीवन में तनाव
किंतु ध्यान रहे — यह निश्चित परिणाम नहीं!
ज्योतिष संभावनाओं का शास्त्र है। पुराण और ग्रंथों में विभिन्न दोष-निवारण के उपाय भी वर्णित हैं।
नाड़ी दोष के उपाय (Nadi Dosha Remedies)
शास्त्रीय संदर्भ अनुसार दोष शमन संभव है, जैसे —
- भगवान शिव/विष्णु पूजन
- रुद्राभिषेक, नाड़ी दोष निवारण पूजा
- विवाहित जोड़े को दान
- उच्च गुण मिलान होने पर दोष क्षय
- नवांश कुंडली विश्लेषण
- अनुभवी ज्योतिष द्वारा Matching & Pariksha
मंत्र महोदधि व विभिन्न पुराणों में विवाह दोष निवारण की विधियाँ मिलती हैं।
Nadi Koot क्यों इतना महत्वपूर्ण माना गया है?
क्योंकि यह निर्धारित करता है —
- Compatibility of Energy (Pranic Flow)
- भावनात्मक Resonance
- Reproductive Harmony
- Long-term bonding
नाड़ी कूट विवाह की सफलता और भावनात्मक जुड़ाव का एक मुख्य आधार है, इसलिए कुंडली मिलान में इसे अत्यधिक महत्व दिया जाता है।
नाड़ी दोष हो तो क्या शादी नहीं करनी चाहिए?
सीधे “No” कहना सही नहीं होगा।
अगर अन्य गुण अच्छे हों, विशेषकर —
✔ गुण मिलान कुल 18+
✔ ग्रह स्थिति शुभ
✔ नवांश-लग्न संतुलित
✔ परामर्श + उपाय किए गए
तो विवाह संभव माना गया है।
❓ FAQ – नाड़ी कूट/नाड़ी दोष से जुड़े प्रश्न
Q1. नाड़ी कूट में 8 अंक क्यों मिलते हैं?
A. यह स्वास्थ्य व संतान योग से जुड़ा है, इसलिए Highest Points दिए गए हैं।
Q2. क्या नाड़ी दोष होने पर शादी रुक जाती है?
A. आवश्यक नहीं। समाधान, ग्रह संतुलन और गुण संख्या देखी जाती है।
Q3. क्या प्रेम विवाह में भी नाड़ी मिलान देखा जाता है?
A. हाँ, compatibility समझने में उपयोगी है, decision rigid नहीं।
Q4. क्या नाड़ी दोष के उपाय प्रभावी हैं?
A. शास्त्रों में उपाय बताए गए हैं, सही मार्गदर्शन से शमन संभव माना जाता है।
Conclusion
- नाड़ी कूट विवाह मिलान का सबसे महत्वपूर्ण भाग है।
- यदि नाड़ी भिन्न हो तो 8 अंक पूर्ण मिलते हैं, जिससे match माना जाता है।
- परंतु समान नाड़ी की स्थिति में दोष बनता है जिसे नाड़ी दोष कहते हैं।
- फिर भी अंतिम निर्णय सिर्फ नाड़ी देखकर नहीं लिया जाता,
- पूरी कुंडली, नवांश और उपायों को ध्यान में रखकर ही विवाह निर्णय सर्वोत्तम होता है।