भारत में शादी सिर्फ एक सामाजिक बंधन नहीं, बल्कि दो व्यक्तियों के स्वभाव, सोच और जीवनशैली का मेल है। अक्सर देखा जाता है कि कई रिश्ते सिर्फ इसलिए संघर्ष में बदल जाते हैं क्योंकि स्वभाव मेल नहीं खाता। ज्योतिष में इसी मानसिक-सामंजस्य को मापने के लिए अष्टकूट मिलान का चौथा कूट — गण कूट प्रयोग किया जाता है। यदि गण सही मिल जाए तो दांपत्य जीवन में समझ, सम्मान और प्रेम स्वाभाविक रूप से बढ़ते हैं, अन्यथा छोटी-छोटी बातों से तकरार की स्थिति भी बन सकती है।
बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में स्पष्ट उल्लेख है —
“गण भेदे कलहो नित्यं, सम्यक् गणात् सुखं भवेत्”
अर्थात — यदि गण मेल न खाए तो कलह की संभावना रहती है, जबकि समान गण सुखद दांपत्य का कारण बनता है।
अब आगे बढ़ते हैं और सरल भाषा में समझते हैं कि गण कूट क्या है, इसके प्रकार, गणना, गुण, और विवाह पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।
गण कूट क्या है?
गण कूट जन्म नक्षत्र-आधारित वर्गीकरण है। इसमें प्रत्येक व्यक्ति का स्वभाव तीन श्रेणियों में बांटा जाता है — देव, मनुष्य और राक्षस गण।
इसका उद्देश्य यह जानना है कि विवाह में दोनों का Nature, Behaviour और Temperament एक-दूसरे से मेल खाएगा या नहीं।
सरल शब्दों में —
👉 Gana Koot Compatibility स्कोर है जो स्वभाव और समझ को दर्शाता है।
शादी से पहले कुंडली मिलान: जानिए क्यों ज़रूरी?
गण कूट में कितने गुण मिलते हैं?
गण कूट में कुल 6 गुण मिलते हैं।
| मिलान स्थिति | मिलने वाले गुण |
|---|---|
| समान गण | 6 गुण |
| मनुष्य + देव | 5 गुण (अनुकूल) |
| देव + राक्षस | 1 गुण (अल्प शुभ) |
| मनुष्य + राक्षस | 0 गुण (अशुभ/विरोधी) |
➡ अच्छे विवाह योग के लिए कम से कम 4+ गुण बेहतर माने जाते हैं।
गण के तीन प्रकार और उनका स्वभाव
1️⃣ देव गण (Spiritual Nature)
- शांत, विनम्र, दयालु
- आध्यात्मिक रुचि
- Emotional और समझदार
उदाहरण नक्षत्र: अश्विनी, मृगशिरा, हस्त, अनुराधा आदि
2️⃣ मनुष्य गण (Practical Nature)
- व्यावहारिक, तर्कशील
- जीवन में संतुलित सोच
- न emotional ज्यादा, न कठोर
उदाहरण नक्षत्र: कृतिका, रोहिणी, श्रवण, रेवती आदि
3️⃣ राक्षस गण (Dominant Nature)
- साहसी, assertive, तेज स्वभाव
- Risk taking attitude
- क्रोध जल्दी पर शांत भी जल्दी
उदाहरण नक्षत्र: आर्द्रा, चित्रा, विशाखा आदि
(संदर्भ: अष्टकूट विवेचन ग्रंथ एवं पाराशर ज्योतिष सिद्धांत)
गण कूट कैसे मैच किया जाता है?
गण मिलान की प्रक्रिया काफी आसान है:
- लड़का और लड़की का जन्म नक्षत्र पता करें
- नक्षत्र के अनुसार उनका गण वर्ग देखें
- दोनों के गण को तुलना तालिका से मिलाएँ
- Compatibility के अनुसार गुण तय होते हैं
👉 समान गण होने पर पूर्ण 6 गुण प्राप्त हो सकते हैं।
विवाह में गण कूट का प्रभाव
यदि गण मेल हो:
- स्वभाव तालमेल शानदार
- बातचीत सहज
- निर्णयों में सहयोग
- प्यार और सम्मान बढ़ता है
यदि गण न मिले:
- Ego clash
- छोटी बातों में बहस
- भावनात्मक असंतुलन
- रिश्ते में खिंचाव
हालांकि, यह पूर्ण निष्कर्ष नहीं — अन्य कूट और पूरी कुंडली भी साथ देखें।
शास्त्र क्या कहते हैं?
गण कूट का वर्णन प्रमुख रूप से मिलता है—
- बृहत पाराशर होरा शास्त्र
- गरुड़ पुराण – विवाह अध्याय
- जैमिनी ज्योतिष सूत्र
शास्त्रों में बताया गया है कि गण सामंजस्य ही दांपत्य सुख की नींव है।
FAQ – गण कूट से जुड़े लोकप्रिय सवाल
Q1. क्या गण कूट mismatch होने पर शादी नहीं हो सकती?
केवल इसी आधार पर निर्णय न लें। अन्य कूट अच्छे हों तो विवाह सफल हो सकता है।
Q2. कितने गुण मिलने चाहिए?
6 में से 4 या अधिक गुण शुभ माने जाते हैं।
Q3. क्या गण दोष का निवारण है?
पूजन, मंत्र, ग्रह-शांति और योग्य ज्योतिषी मार्गदर्शन उपयुक्त रहता है।
Q4. Love marriage में भी गण कूट देखा जाता है?
हाँ। यह understanding को आंकने का ऐतिहासिक तरीका है।
Conclusion
गण कूट विवाह मिलान में स्वभाव Compatibility का सबसे महत्वपूर्ण संकेतक है। यदि गण अनुकूल हों तो दांपत्य जीवन सुखद, सामंजस्यपूर्ण और स्थिर रहने की संभावना अधिक होती है। लेकिन विवाह निर्णय हमेशा सम्पूर्ण कुंडली विश्लेषण के आधार पर ही करें, न कि केवल एक factor देखकर।