महाकाल मंदिर में प्रवेश नियमों पर छिड़ी बहस
उज्जैन| BDC News|bhopalonline.org
उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को प्रतिबंधित करने की मांग ने अब तूल पकड़ लिया है। उत्तराखंड के चारधाम और गंगोत्री धाम में इसी तरह की पाबंदी की चर्चाओं के बीच महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारियों और हिंदूवादी संगठनों ने केंद्र व राज्य सरकार से कड़े नियम लागू करने को कहा है।
पुजारियों का तर्क: आस्था या पर्यटन?
महाकाल मंदिर के वरिष्ठ पुजारी महेश शर्मा का कहना है कि मंदिर आस्था का केंद्र है, न कि केवल घूमने-फिरने की जगह। उनका तर्क है कि जो गैर-हिंदू सनातन धर्म में सच्ची श्रद्धा रखते हैं, उन्हें नहीं रोका जाना चाहिए, लेकिन केवल पर्यटन या गलत मंशा से आने वालों पर प्रतिबंध अनिवार्य है ताकि धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
सभी ज्योतिर्लिंगों के लिए उठी मांग
हिंदू जागरण मंच के रितेश माहेश्वरी ने इस मांग को और विस्तार देते हुए कहा कि यह व्यवस्था देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों में लागू होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल ‘घर वापसी’ (धर्म परिवर्तन कर पुनः हिंदू बने) करने वालों को छोड़कर अन्य गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित किया जाए।
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सुरक्षा और संवेदनशीलता का हवाला
माहेश्वरी ने दावा किया कि वर्ष 2025 में मंदिर परिसर से एक दर्जन से अधिक ऐसे युवकों को पकड़ा गया जो संदेहास्पद स्थितियों में वहां मौजूद थे। उनके अनुसार, महाकाल क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए काल भैरव, मंगलनाथ और सांदीपनि आश्रम जैसे प्रमुख मंदिरों में भी अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए प्रवेश नियमों को सख्त किया जाना चाहिए।
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