विवाह सिर्फ दो लोग नहीं, दो ऊर्जा, दो सोच और दो जीवन को जोड़ने का पवित्र बंधन है। हिंदू विवाह में कुंडली मिलान इसी संगति को परखने की सबसे अहम प्रक्रिया मानी जाती है। अष्टकूट मिलान में कुल 36 गुण होते हैं, जिनमें से भकूट कूट (Bhakoot Koot) को बेहद महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। क्यों? क्योंकि यह सीधे वैवाहिक सामंजस्य, भावनात्मक मेल और दांपत्य स्थिरता से जुड़ा है।
वेदिक ज्योतिष के अनुसार यदि भकूट मेल सही न हो, तो प्रेम रहते हुए भी रिश्ते में मतभेद, दूरियां और बाधाएं बढ़ सकती हैं। इसलिए हर शादी में भकूट मिलान compulsory माना गया है।
भकूट कूट क्या है? (Bhakoot Koot Meaning)
भकूट कूट चंद्र राशि पर आधारित कूट है।
कुंडली मिलान के दौरान दूल्हा-दुल्हन की चंद्र राशि का आपसी संबंध देखा जाता है। यह मिलान प्रेम, आपसी सामंजस्य और नियति संगति को दर्शाता है।
संदर्भ: बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में चंद्र राशि को दांपत्य सुख और मानसिक स्थिरता का प्रमुख कारक बताया गया है।
अष्टकूट मिलान में भकूट कूट की स्थिति और अंक
अष्टकूट में भकूट के 7 अंक निर्धारित हैं।
यदि भकूट मेल उत्तम हो, तो दोनों को 7/7 अंक मिलते हैं,
और यदि मेल प्रतिकूल हो, तो अंक 0 भी हो सकते हैं।
✔ भकूट कूट अंक तालिका (Bhakoot Point Chart)
| कुंडली भकूट संबंध | परिणाम | अंक |
|---|---|---|
| समान राशि (Same Rashi) | शुभ | 7 |
| 2/12 योग (Dwitiya-Dwadash) | अशुभ | 0 |
| 5/9 योग (Pancham-Navam) | संतति बाधा की संभावना | 0 |
| 4/10 योग (Chaturth-Dasham) | वैवाहिक मतभेद संभव | 1-2 |
| 3/11 योग (Tritiya-Ekadash) | उत्तम, सहयोग व प्रगति | 5 |
| 6/8 योग (Shasht-Ashtam) | स्वास्थ्य/तनाव संभावित | 0-1 |
भकूट कूट में कौन-कौन से योग बनते हैं?
भकूट मिलान में कुल 7 प्रमुख योग मानें जाते हैं —
- समान राशि योग – सर्वोत्तम
- 3/11 योग – सहयोगी व सहायक रिश्ते
- 4/10 योग – कार्य और विचार में मतभेद
- 2/12 योग – आर्थिक/सम्बंध दूरी की आशंका
- 5/9 योग – संतान से जुड़े मतभेद
- 6/8 योग – स्वास्थ्य और संघर्ष संभावित
- 7/7 (Perfect Match) – समरसता व सुख
जातक-पारिजात में वर्णित है कि पञ्चम-नवम संबंध (5/9) पितृ-संतान भाव से जुड़ा होने के कारण दांपत्य में तनाव व संतान पक्ष में बाधा बना सकता है।
भकूट दोष क्या है? (Bhakoot Dosha)
जब दूल्हा-दुल्हन की चंद्र राशियों के मध्य
2/12, 5/9, 6/8 संबंध बनता है, तो भकूट दोष माना जाता है।
संभावित प्रभाव
- विचारों में मतभेद
- भावनात्मक दूरी
- संतान पक्ष चिंता
- आर्थिक तनाव
- रिश्ता टिकने में चुनौती
⚠ ध्यान रहे — यह निश्चित परिणाम नहीं, केवल संभावनाएँ हैं।
ज्योतिष में अन्य ग्रह योग, लग्न, नवांश बहुत मायने रखते हैं।
भकूट दोष के उपाय (ऐतिहासिक संदर्भ अनुसार)
शास्त्रों में समाधान भी दिए गए हैं —
- गुण मिलान में उच्च स्कोर होने पर दोष कम हो सकता है
- नवांश कुंडली में सामंजस्य होने पर परिणाम बेहतर
- मंत्र जाप, पूजा-उपाय, समाजिक परामर्श उपयोगी माने गए
- अनुभवी ज्योतिषी से मिलान कराना आवश्यक
पराशर एवं वराहमिहिर के ग्रंथों में दोष-परिहार हेतु ग्रह शांति व श्रेष्ठ मुहूर्त का विधान मिलता है।
FAQ – भकूट कूट से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q1. क्या भकूट दोष होने पर शादी नहीं करनी चाहिए?
A. हमेशा नहीं। यदि अन्य गुण अच्छे हों, नवांश संतुलित हो और कुंडली में समर्थ योग हों तो विवाह संभव है।
Q2. भकूट कूट में कितने अंक मिलना चाहिए?
A. आदर्श 7 अंक। 5+ भी अच्छा माना जाता है। 0 अंक स्थिति में गहन जांच ज़रूरी।
Q3. क्या प्रेम विवाह में भकूट मिलान उपयोगी है?
A. हाँ, compatibility समझने के लिए helpful है पर final decision सिर्फ भकूट पर आधारित ना हो।
Q4. क्या भकूट दोष के उपाय सफल होते हैं?
A. सही मार्गदर्शन, पूजा, ग्रह शांति, और योग-संतुलन से राहत संभव बताई जाती है।
शादी से पहले कुंडली मिलान: जानिए क्यों ज़रूरी?
भकूट कूट सिर्फ एक अंक नहीं,
भावनात्मक tune-up, understanding और जीवन सामंजस्य की परीक्षा है।
अच्छे भकूट मिलने पर विवाह में सहयोग, प्रेम व स्थिरता बढ़ती है।
दोष बन भी जाए, तो उपाय और शेष गुणों का विश्लेषण जरूरी है।
इसलिए जल्दबाजी नहीं — समग्र कुंडली मिलान ही सबसे सटीक मार्ग है।
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