कुंडली मिलान की बात आते ही अधिकतर लोग गुण मिलान तक ही सीमित रह जाते हैं। लेकिन वैदिक ज्योतिष में एक ऐसा कूट है, जिसे विवाह का प्राण तत्व माना गया है — नाड़ी कूट।
नाड़ी कूट के तीन प्रकार होते हैं — आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अन्त्य नाड़ी।
आज हम विस्तार से समझेंगे अन्त्य नाड़ी (Antya Nadi) को —
यह नाड़ी भावनात्मक गहराई, सहनशीलता और गूढ़ मानसिक शक्ति का प्रतीक मानी जाती है।
अन्त्य नाड़ी क्या होती है? (What is Antya Nadi)
वैदिक ज्योतिष के अनुसार नाड़ी, व्यक्ति की जीवन ऊर्जा (Life Force) और
उसके स्वभाव, स्वास्थ्य और संतान सुख को दर्शाती है।
📖 बृहत पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार:
“नाड़ी दोष संतान, स्वास्थ्य और दांपत्य सुख को प्रभावित करता है।”
अन्त्य नाड़ी को पित्त प्रधान नाड़ी माना जाता है।
यह नाड़ी व्यक्ति के अंदर की गहराई, भावनात्मक तीव्रता और आत्मचिंतन की क्षमता को दर्शाती है।
सरल शब्दों में कहें तो —
👉 Antya Nadi wale log zyada gehra mehsoos karte hain, superficial nahi hote.
अन्त्य नाड़ी के अंतर्गत आने वाले नक्षत्र
अन्त्य नाड़ी में कुल 9 नक्षत्र आते हैं:
- पुनर्वसु
- पुष्य
- आश्लेषा
- विशाखा
- अनुराधा
- ज्येष्ठा
- पूर्वाभाद्रपद
- उत्तराभाद्रपद
- रेवती
यदि लड़का और लड़की दोनों का जन्म नक्षत्र इसी समूह में हो,
तो दोनों की अन्त्य नाड़ी मानी जाती है।
अन्त्य नाड़ी वाले जातकों का स्वभाव
अन्त्य नाड़ी के जातक सामान्यतः:
- गहरे सोचने वाले
- भावनात्मक रूप से intense
- रिश्तों में बहुत serious
- Loyal लेकिन sensitive
- कभी-कभी overthinking करने वाले
- अंदर से मजबूत, बाहर से शांत
ये लोग रिश्तों को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ते।
विवाह में अन्त्य नाड़ी का महत्व
अष्टकूट मिलान में नाड़ी कूट को 8 गुण दिए गए हैं — सबसे अधिक।
इससे स्पष्ट होता है कि विवाह में इसका महत्व कितना ज्यादा है।
✔ शुभ स्थिति
- अन्त्य नाड़ी + आदि नाड़ी
- अन्त्य नाड़ी + मध्य नाड़ी
➡ पूरे 8/8 गुण मिलते हैं
➡ भावनात्मक संतुलन और पारिवारिक सुख
विचार योग्य स्थिति
- अन्त्य नाड़ी + अन्त्य नाड़ी
➡ 0 गुण
➡ इसे नाड़ी दोष कहा जाता है
अन्त्य नाड़ी में नाड़ी दोष कब बनता है?
जब वर-वधू दोनों की अन्त्य नाड़ी हो,
तो शास्त्रों में इसे नाड़ी दोष माना गया है।
📖 जातक पारिजात और फलदीपिका के अनुसार
नाड़ी दोष से निम्न समस्याएं बताई गई हैं:
- संतान सुख में बाधा
- भावनात्मक असंतुलन
- मानसिक तनाव
- स्वास्थ्य से जुड़े उतार-चढ़ाव
- आपसी misunderstanding
⚠️ लेकिन ध्यान रखें —
यह केवल संभावनाएं हैं, अंतिम सत्य नहीं।
अन्त्य नाड़ी दोष के शमन उपाय
शास्त्रों में नाड़ी दोष को कम करने या शांत करने के उपाय बताए गए हैं:
- भगवान शिव का रुद्राभिषेक
- महामृत्युंजय मंत्र जाप
- विष्णु सहस्रनाम पाठ
- नाड़ी दोष निवारण पूजा
- दान-पुण्य (अन्न, वस्त्र, तिल)
- यदि कुल गुण 18 से अधिक हों तो दोष कमजोर माना जाता है
📌 गरुड़ पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि
“उचित उपायों से विवाह दोषों का शमन संभव है।”
FAQ – अन्त्य नाड़ी से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q1. क्या अन्त्य नाड़ी अशुभ होती है?
नहीं। यह भावनात्मक गहराई और समर्पण की नाड़ी है।
Q2. अन्त्य नाड़ी दोष होने पर शादी नहीं करनी चाहिए?
ऐसा नहीं है। संपूर्ण कुंडली, नवांश और उपाय देखने जरूरी हैं।
Q3. क्या केवल नाड़ी देखकर निर्णय लेना सही है?
नहीं। ग्रह स्थिति और कुल गुण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
Q4. प्रेम विवाह में भी अन्त्य नाड़ी देखी जाती है?
Q4. प्रेम विवाह में भी अन्त्य नाड़ी देखी जाती है?
Conclusion
अन्त्य नाड़ी गहराई, भावनात्मक जुड़ाव और आत्मिक संबंध की प्रतीक है।
ऐसे लोग रिश्तों को निभाने में पूरे मन से लगते हैं।
यदि अन्त्य नाड़ी का मेल आदि या मध्य नाड़ी से हो,
तो विवाह अत्यंत शुभ माना जाता है।
यदि दोनों की अन्त्य नाड़ी हो,
तो घबराने की जरूरत नहीं —
उपाय, नवांश कुंडली और अनुभवी ज्योतिषी का मार्गदर्शन
इस दोष को काफी हद तक शांत कर सकता है।
👉 अंतिम सलाह:
शादी का फैसला कभी भी केवल एक कूट के आधार पर न करें, पूरी कुंडली जरूर देखें।