DAVV इंदौर में संग्राम: UGC के नए नियमों पर मचा बवाल, क्या सवर्ण छात्रों के साथ हो रहा है भेदभाव?

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इंदौर Bhopalonline.org। BDC News :

देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) का आरएनटी मार्ग परिसर मंगलवार को छावनी में तब्दील हो गया। मौका था UGC New Equity Regulations 2026 के खिलाफ छात्रों के भारी आक्रोश । राजपूत करणी सेना और विभिन्न छात्र संगठनों ने इस नीति को ‘एकतरफा’ बताते हुए जोरदार प्रदर्शन किया गया है |

कैंपस में माहौल तब और भावुक हो गया जब छात्रों ने सरकार की ‘सद्बुद्धि’ के लिए सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया गया । छात्रों का सीधा सवाल है—क्या नए नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों की सुरक्षा की अनदेखी की गई है?

विवाद की जड़: ‘पीड़ित’ की परिभाषा पर तकरार

छात्रों और विशेषज्ञों के विरोध का सबसे बड़ा कारण UGC New Equity Regulations 2026′ में भेदभाव की परिभाषा है। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इस ड्राफ्ट में एक गंभीर खामी है।

विरोध के 3 मुख्य बिंदु:

  • अधूरी परिभाषा: नए नियमों में SC, ST, OBC, महिलाओं और दिव्यांगों को तो ‘पीड़ित’ की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों को इससे बाहर रखा गया है।
  • दुरुपयोग का डर: ड्राफ्ट से ‘झूठी शिकायतों’ पर सजा का प्रावधान हटा दिया गया है। छात्रों को डर है कि इससे सवर्ण छात्रों को निशाना बनाया जा सकता है।
  • एकतरफा कमेटी: मांग की जा रही है कि ‘Equity कमेटी’ में सभी वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हों ताकि फैसला निष्पक्ष हो सके।

करणी सेना का अल्टीमेटम:

करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष अनुराग प्रतापसिंह ने इस लड़ाई को आर-पार की जंग करार दिया है। उन्होंने आगामी आंदोलनों की एक सख्त रूपरेखा पेश की है:

  1. 1 फरवरी 2026: केंद्र सरकार के फैसले के विरोध में ‘भारत बंद’ का आह्वान।
  2. 2 फरवरी 2026: मध्य प्रदेश के सभी सांसदों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
  3. चेतावनी: जो सांसद इस नीति का विरोध नहीं करेंगे, उन्हें विरोध स्वरूप ‘चूड़ियाँ’ भेंट की जाएंगी और उनके घरों का घेराव होगा।

समझिए क्या है प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन 2026′ का ढांचा?

UGC ने 13 जनवरी को यह नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसे 15 जनवरी से लागू माना जा रहा है। इसके तहत कॉलेजों में तीन नए स्तर काम करेंगे:

निकाय (Body)मुख्य जिम्मेदारी
EOC (इक्वल अपॉरच्युनिटी सेंटर)वंचित वर्ग को कानूनी और वित्तीय सलाह देना।
इक्विटी कमेटीशिकायत मिलने पर 24 घंटे में बैठक और सुनवाई।
इक्विटी स्क्वाडकैंपस में भेदभाव रोकने के लिए निगरानी रखना।

इस पूरी प्रक्रिया में 15 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य कर दिया गया है।

डॉ. रोहिणी घावरी का संतुलित रुख

प्रसिद्ध स्कॉलर डॉ. रोहिणी घावरी ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “संवैधानिक समानता सबका अधिकार है, लेकिन सच्ची इक्विटी तभी आएगी जब सुरक्षा सबको मिले।” उनका तर्क है कि नियम ऐसे हों जो वंचितों को न्याय दें, लेकिन किसी अन्य वर्ग में असुरक्षा न पैदा करें।


निष्कर्ष: आगे क्या?

छात्रों का सबसे बड़ा दर्द यह है कि नए नियमों के अनुसार, सवर्ण छात्र ‘आरोपी’ तो बन सकते हैं, लेकिन अपनी पीड़ा बताने के लिए ‘पीड़ित’ नहीं कहला सकते। इंदौर से उठी यह चिंगारी अब राष्ट्रीय स्तर पर बहस का मुद्दा बन गई है। अब देखना यह है कि क्या शिक्षा मंत्रालय और UGC इन सुझावों पर गौर करेंगे या विरोध और उग्र होगा।

क्या आपको लगता है कि यूजीसी के नियमों में बदलाव की जरूरत है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।


1. UGC प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026 क्या है?

यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी एक नया नियम है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति, लिंग या शारीरिक अक्षमता के आधार पर होने वाले भेदभाव को रोकना और छात्रों को न्याय दिलाने के लिए एक तेज़ तंत्र (जैसे इक्विटी कमेटी और स्क्वाड) बनाना है।

2. इंदौर के DAVV में छात्र विरोध क्यों कर रहे हैं?

छात्रों का मुख्य विरोध ‘भेदभाव’ की परिभाषा को लेकर है। उनका आरोप है कि नए नियमों में SC, ST, OBC और महिलाओं को तो सुरक्षा दी गई है, लेकिन सामान्य वर्ग (General Category) के छात्रों को ‘पीड़ित’ की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।

3. क्या नए नियमों में ‘झूठी शिकायत’ पर दंड का प्रावधान है?

प्रदर्शनकारियों और विशेषज्ञों का दावा है कि नए ड्राफ्ट से झूठी शिकायत करने वालों पर लगने वाले दंड के प्रावधान को हटा दिया गया है, जिससे इस कानून के दुरुपयोग की आशंका बढ़ गई है।

4. ‘इक्विटी कमेटी’ (Equity Committee) कैसे काम करेगी?

नियमों के अनुसार, किसी भी भेदभाव की शिकायत मिलने पर कॉलेज के प्रमुख की अध्यक्षता वाली इस कमेटी को 24 घंटे के भीतर बैठक करनी होगी और 15 दिनों के अंदर अपनी जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी।

5. करणी सेना ने ‘भारत बंद’ का आह्वान कब किया है?

राजपूत करणी सेना ने इस नीति के विरोध में 1 फरवरी, 2026 को भारत बंद का आह्वान किया है। साथ ही 2 फरवरी को सांसदों का घेराव करने की चेतावनी दी है।

6. क्या यह नियम पूरे देश में लागू हो गया है?

UGC ने इसका नोटिफिकेशन 13 जनवरी को जारी किया था और इसे 15 जनवरी, 2026 से प्रभावी माना जा रहा है। अब देशभर के विश्वविद्यालयों को इसके तहत अपनी कमेटियां गठित करनी होंगी।

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