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भारतीय घरों में भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि प्रेम और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। लंच हो या डिनर, रोटी हमारी थाली का सबसे अहम हिस्सा है। आधुनिक और शहरी जीवनशैली में अक्सर लोग खाने की बर्बादी रोकने के लिए घर के सदस्यों से पूछकर या गिनकर रोटियां बनाते हैं। व्यावहारिक रूप से यह सही लग सकता है, लेकिन हमारे शास्त्रों और ज्योतिष विज्ञान में रोटियों को गिनकर बनाना या परोसना बेहद अशुभ माना गया है।
शुभ और अशुभ का गणित: क्यों न गिनें रोटियां?
शास्त्रों के अनुसार, रसोई को घर का सबसे पवित्र स्थान माना जाता है। यहाँ ‘अन्नपूर्णा’ का वास होता है। जब हम रोटियां गिनकर बनाते हैं, तो हम अनजाने में अपनी समृद्धि को ‘सीमित’ कर देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
1. सूर्य और मंगल का प्रभाव (ग्रह दोष)
गेहूं का संबंध सूर्य देव से माना जाता है। रोटियां गिनकर बनाना सूर्य देव का अनादर माना जाता है। इसके अलावा, अग्नि (चूल्हा) का संबंध मंगल से है। गिन-गिन कर खाना बनाने से कुंडली में इन ग्रहों की स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे घर में कलह और तनाव बढ़ सकता है।
2. दरिद्रता को आमंत्रण
गिनकर खाना बनाना ‘मानसिक गरीबी’ का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि हमारे पास चीजों का अभाव है। सनातन परंपरा में माना जाता है कि रसोई में हमेशा दो-चार रोटियां अतिरिक्त ही बनानी चाहिए। पहली रोटी गाय के लिए और आखिरी रोटी कुत्ते के लिए निकालने का विधान है। यदि आप गिनकर रोटी बनाएंगे, तो इन मूक पशुओं का हिस्सा खत्म हो जाएगा, जिसे दोष माना जाता है।
3. नकारात्मक ऊर्जा का संचार
रसोई घर का दिल है। यदि गृहणी गिन-गिनकर या चिड़चिड़ेपन में रोटी बनाती है, तो वह नकारात्मक ऊर्जा भोजन के जरिए परिवार के सदस्यों के शरीर में प्रवेश करती है। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव उत्पन्न हो सकता है।
बरकत के लिए अपनाएं ये नियम
- कभी भी यह न पूछें कि “कितनी रोटियां खाओगे?” इसके बजाय अंदाजे से पर्याप्त भोजन बनाएं।
- मेहमान के आने की संभावना को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त आटा गूंथें।
- पहली रोटी हमेशा गाय के लिए निकालें, इससे पितृ दोष और गृह दोष दूर होते हैं।
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