हलवा: जब देश का बजट बनाने वाले 100 लोग दुनिया के लिए हो जाते हैं’लापता’

हलवा: जब देश का बजट बनाने वाले 100 लोग दुनिया के लिए हो जाते हैं’लापता’

हलवा, हड़बड़ी और वो अंधेरा बेसमेंट

कहानी की शुरुआत एक मीठे स्वाद से होती है… कल्पना कीजिए, देश की वित्त मंत्री एक बड़ी सी कड़ाही में खुद हलवा चला रही हैं। चारों तरफ मुस्कुराहटें हैं, कैमरे चमक रहे हैं और माहौल किसी उत्सव जैसा है। लेकिन जैसे ही हलवे की आखिरी प्लेट खाली होती है, नॉर्थ ब्लॉक के उस सफेद गलियारे में सन्नाटा पसर जाता है। अचानक एक लोहे का दरवाजा बंद होता है, भारी ताले लटक जाते हैं और देखते ही देखते 100 से ज्यादा अधिकारी और कर्मचारी दुनिया की नजरों से ओझल हो जाते हैं।

यह किसी थ्रिलर फिल्म का सीन नहीं, बल्कि भारत के ‘बजट’ की छपाई से पहले की हकीकत है। जिसे हम ‘हलवा सेरेमनी’ कहते हैं, वह असल में एक ऐसी कैद की शुरुआत है, जहाँ से वापसी सिर्फ 1 फरवरी को ही मुमकिन है।

दुनिया का सबसे सुरक्षित बंकर: जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता

जैसे ही हलवा सेरेमनी खत्म होती है, ‘लॉक-इन’ पीरियड शुरू हो जाता है। ये तमाम अधिकारी वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में स्थित प्रिंटिंग प्रेस में चले जाते हैं। यहाँ की दुनिया बाहर की दुनिया से पूरी तरह अलग है:

  • स्मार्टफोन का अंत: यहाँ न इंटरनेट है, न ही मोबाइल। कर्मचारी अपने साथ अपना फोन नहीं ले जा सकते।
  • जासूसी की साये में बातचीत: अगर कोई बहुत जरूरी बात करनी हो, तो सिर्फ लैंडलाइन फोन है। लेकिन याद रहे, उस फोन के दूसरी तरफ इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कान लगे होते हैं।
  • इमरजेंसी में भी ‘नो एग्जिट’: अगर अंदर किसी की तबीयत खराब हो जाए, तो डॉक्टर अंदर आएगा, लेकिन बीमार कर्मचारी बाहर नहीं जा सकता। परिवार से संपर्क पूरी तरह काट दिया जाता है।

क्यों दी जाती है यह ‘अघोषित कैद’?

शायद आप सोचें कि आज के डिजिटल दौर में, जहाँ बजट टैबलेट पर पढ़ा जाता है, इतनी सख्ती क्यों? इसका जवाब छिपा है इतिहास के एक काले पन्ने में। साल 1950 में बजट का एक हिस्सा लीक हो गया था, जिससे सरकार की भारी फजीहत हुई थी। तब से तय हुआ कि जब तक वित्त मंत्री संसद में पहला शब्द न बोल दें, तब तक बजट का एक भी आंकड़ा बाहर नहीं जाना चाहिए।

अगर बजट लीक हो जाए, तो शेयर बाजार रातों-रात ढह सकता है और बड़े जमाखोर देश की अर्थव्यवस्था से खेल सकते हैं। यह ‘लॉक-इन’ असल में डेटा सिक्योरिटी का सबसे अभेद्य किला है। साइबर हैकिंग के इस दौर में, इंसानों को फिजिकल तौर पर लॉक करना ही सबसे सुरक्षित फायरवॉल माना जाता है।

1 फरवरी: जब मिलती है ‘आजादी’

जब वित्त मंत्री संसद में बजट भाषण शुरू करती हैं, तभी नॉर्थ ब्लॉक के उस बेसमेंट के ताले खुलते हैं। कई दिनों से सूरज की रोशनी और अपनों की आवाज के लिए तरस रहे इन अधिकारियों के लिए वह दिन सिर्फ बजट पेश होने का नहीं, बल्कि अपनी ‘आजादी’ का भी होता है।

अगली बार जब आप टीवी पर वित्त मंत्री को हलवा बांटते देखें, तो समझ जाइएगा कि देश की अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए कुछ लोग अब ‘कैद’ होने जा रहे हैं।


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