बिजनेस डेस्क|BDC News|bhopalonline.org
भारतीय बजट के इतिहास में कुछ ऐसी कहानियाँ और तथ्य छिपे हैं, जो किसी फिल्मी थ्रिलर से कम नहीं हैं। 1 फरवरी को आने वाले बजट से पहले, आइए जानते हैं बजट की वो अनसुनी कहानियाँ जो इसे दुनिया का सबसे गोपनीय दस्तावेज़ बनाती हैं:
1. बजट का ‘हलवा’ और 10 दिनों का वनवास
बजट छपाई शुरू होने से पहले वित्त मंत्रालय में ‘हलवा रस्म’ होती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके बाद बजट से जुड़े 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी मंत्रालय के बेसमेंट में कैद हो जाते हैं? अगले 10 दिनों तक उन्हें अपने परिवार से बात करने, बाहर जाने या इंटरनेट इस्तेमाल करने की इजाज़त नहीं होती। यह दुनिया की सबसे कड़ी ‘गोपनीयता’ (Secrecy) की मिसाल है।
2. जब बजट के कारण बदल गया भारत का ‘टाइम’
साल 2001 से पहले तक भारत का बजट शाम 5 बजे पेश होता था। यह अंग्रेजों के समय की परंपरा थी ताकि लंदन के लोग (वहां सुबह 11:30 बजे) इसे सुन सकें। लेकिन तत्कालीन वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस गुलामी की रस्म को तोड़ा और पहली बार सुबह 11 बजे बजट पेश किया, जो आज भी जारी है।
3. ब्रीफकेस से टैबलेट तक का सफर
सालों तक वित्त मंत्री एक भारी चमड़े का ब्रीफकेस लेकर संसद पहुँचते थे (बजट शब्द फ्रेंच के ‘Bougette’ से आया है, जिसका अर्थ है छोटा बैग)। लेकिन 2019 में निर्मला सीतारमण ने इस औपनिवेशिक परंपरा को खत्म कर ‘बही-खाता’ (लाल कपड़े में लिपटा दस्तावेज) अपनाया और फिर 2021 में देश का पहला पेपरलेस बजट एक मेड-इन-इंडिया टैबलेट के जरिए पेश किया।
4. सबसे छोटा और सबसे लंबा भाषण
- लंबाई का रिकॉर्ड: निर्मला सीतारमण के नाम सबसे लंबा बजट भाषण (2020) देने का रिकॉर्ड है, जो 2 घंटे 42 मिनट तक चला था।
- शब्दों का रिकॉर्ड: सबसे छोटा बजट भाषण मात्र 800 शब्दों का था, जिसे 1977 में हीरूभाई मुलजीभाई पटेल ने पेश किया था।
5. जब प्रधानमंत्री को पेश करना पड़ा बजट
आमतौर पर वित्त मंत्री ही बजट पेश करते हैं, लेकिन इतिहास में तीन बार ऐसा हुआ जब प्रधानमंत्रियों ने खुद बजट पढ़ा। जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्होंने वित्त मंत्रालय का प्रभार संभालते हुए बजट पेश किया।
6. बजट लीक होने का वो किस्सा (1950)
1950 में बजट के कुछ हिस्से राष्ट्रपति भवन में छपाई के दौरान लीक हो गए थे। इसके बाद बजट की छपाई को वहां से हटाकर दिल्ली के मिंटो रोड स्थित प्रेस में स्थानांतरित किया गया और बाद में 1980 से इसकी छपाई वित्त मंत्रालय के नॉर्थ ब्लॉक के अंदर ही होने लगी।
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