भोपाल।
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BHOPAL LIVE : मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में ‘शिक्षक पात्रता परीक्षा’ (TET) की अनिवार्यता ने शिक्षा जगत में भूचाल ला दिया है। बुधवार को राजधानी भोपाल स्थित लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) मुख्यालय पर प्रदेशभर से आए हजारों शिक्षकों ने घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। सिर्फ भोपाल ही नहीं, बल्कि इंदौर सहित तमाम जिलों में भी कलेक्टर कार्यालयों पर शिक्षकों का सैलाब उमड़ा, जिन्होंने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर इस आदेश को ‘तुगलकी’ करार दिया।

क्यों भड़के हैं गुरुजी? क्या है पूरा विवाद?
हाल ही में DPI ने एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत जिन शिक्षकों की रिटायरमेंट में 5 साल से अधिक का समय बचा है, उन्हें 2 साल के भीतर TET पास करना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर उनकी सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं।
शिक्षक संगठनों का तर्क है-
- 70 हजार पुराने शिक्षक निशाने पर: जिनकी नियुक्ति 2011 (TET लागू होने) से पहले हुई थी, उन पर नए नियम थोपना अन्याय है।
- रेट्रोस्पेक्टिव लागू करना गलत: शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति हुई तब यह शर्त नहीं थी, तो अब योग्यता की जांच क्यों?
- अधिकारियों को चुनौती: आक्रोशित शिक्षकों ने मांग की है कि अगर शिक्षकों की बार-बार परीक्षा होगी, तो हर 5 साल में कलेक्टर और प्रशासनिक अधिकारियों की भी UPSC जैसी परीक्षा होनी चाहिए।
अल्टीमेटम: 11 अप्रैल को ब्लॉक जाम और 18 को ‘परिवार’ के साथ आंदोलन
अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा के पदाधिकारी उपेंद्र कौशल ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह सिर्फ शुरुआत है। उन्होंने आंदोलन की रणनीति साझा की।
- 11 अप्रैल: ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन कर मंत्रियों, विधायकों और सांसदों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
- 11 अप्रैल की डेडलाइन: यदि सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में ‘रिव्यू पिटीशन’ दाखिल नहीं की, तो आंदोलन उग्र होगा।
- 18 अप्रैल: प्रदेश के लाखों शिक्षक अपने परिवार और बच्चों के साथ भोपाल में डेरा डालेंगे, जब तक आदेश निरस्त नहीं होता।
एक मंच पर आए सभी संगठन
इस लड़ाई में शासकीय शिक्षक संगठन, प्रांतीय शिक्षक संघ, राज्य शिक्षक संघ और आजाद अध्यापक शिक्षक संघ जैसे तमाम बड़े संगठन एकजुट हो गए हैं। शिक्षकों का कहना है कि TET के साथ-साथ ‘शिक्षक एप’ से हाजिरी जैसे मुद्दों पर भी अब संयुक्त मोर्चा सरकार से सीधे टकराने को तैयार है।
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