सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा: उज्जैन से अयोध्या तक 1000 किमी का सफर

सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा: उज्जैन से अयोध्या तक 1000 किमी का सफर
👁️ 33 Views

भोपाल। BDC NEWS
bhopalonline.org

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 20 अक्टूबर से महाकाल मंदिर, उज्जैन से अयोध्या तक करीब 1000 किलोमीटर लंबी ‘सत्य सनातन स्वाभिमान पदयात्रा’ शुरू करने जा रहे हैं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य धर्म के नाम पर धन कमाने और उसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने वालों का विरोध करना है। 80 साल की उम्र में इतनी लंबी पदयात्रा को लेकर दिग्विजय सिंह का कहना है कि उम्र महज एक संख्या है और अंग्रेजी की कहावत के अनुसार, इंसान उतना ही बूढ़ा महसूस करता है जितना वह खुद को समझता है। यह यात्रा उज्जैन के महाकाल आशीर्वाद से शुरू होकर ओरछा के राम राजा के दर्शन करते हुए अयोध्या के रामलला मंदिर तक पहुंचेगी।

आरएसएस और सावरकर पर सनातन धर्म की छवि बिगाड़ने का आरोप

प्रेसवार्ता के दौरान दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विनायक दामोदर सावरकर पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आरएसएस और सावरकर ने सनातन धर्म को ‘हिंदू’ शब्द के नाम पर विकृत कर दिया है। उनके अनुसार, वेदों, उपनिषदों और अन्य प्राचीन ग्रंथों में ‘हिंदू’ शब्द का कोई जिक्र नहीं मिलता, क्योंकि यह एक फारसी शब्द है। सनातन धर्म दुनिया की सबसे पुरानी धार्मिक परंपराओं में से एक है जिसका मूल संदेश ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी पूरी दुनिया एक परिवार है। उन्होंने महात्मा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि गांधीजी सर्वधर्म समभाव और ‘रघुपति राघव राजा राम’ की भावना को सनातन मानते थे, लेकिन आरएसएस और विहिप (VHP) ने इस सोच को राजनीति के लिए बदल दिया है।

राम मंदिर चंदे और चढ़ावे में 200 से 300 करोड़ की हेराफेरी का दावा

दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण, चंदे और मंदिर के चढ़ावे को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का सनातनी परंपराओं से कोई लेना-देना नहीं है और वे सक्रिय आरएसएस कार्यकर्ता हैं। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर जुटाए गए चंदे, निर्माण कार्यों और अब रामलला को मिलने वाले चढ़ावे (कैश, विदेशी मुद्रा और सोने-चांदी के गहने) में भारी हेराफेरी की गई है। एसआईटी जांच का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आरोपियों ने चोरी की बात कबूल की है और लगभग 8 महीने के सीसीटीवी फुटेज डिलीट कर दिए गए। उनके मुताबिक कुल चोरी और गड़बड़ी 200 से 300 करोड़ रुपए तक हो सकती है।

1989 के रामशिला पूजन और निर्माण लागत पर सवाल

राम मंदिर के इतिहास पर बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने 1989 के रामशिला पूजन अभियान का भी हिसाब मांगा। उन्होंने दावा किया कि उस समय विहिप द्वारा करीब 1400 करोड़ रुपए और चांदी की ईंटें जुटाई गई थीं, जबकि संगठन सिर्फ 8.25 करोड़ रुपए मिलने की बात कहता है। इसके अलावा, उन्होंने मंदिर निर्माण की लागत पर सवाल उठाया जो शुरुआती अनुमान 800 करोड़ से बढ़कर 2200 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। उन्होंने कहा कि वे खुद 1989 में राम मंदिर निर्माण के लिए दान दे चुके हैं और वे संघ-विहिप की विचारधारा को नहीं मानते, लेकिन मंदिर निर्माण का उन्होंने हमेशा समर्थन किया है।

‘शिवधाम से रामधाम’ यात्रा का राजनीतिकरण न करने की अपील

अपनी इस पदयात्रा को गैर-राजनीतिक बताते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसमें हर वर्ग, संप्रदाय और विचारधारा के लोग शामिल हो सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म इंसान को अंदर से बदलता है और जिसके भीतर भगवान राम बस जाते हैं, वह अन्याय या चोरी नहीं कर सकता। राम के नाम पर लूट करने वाले खुद को रामभक्त नहीं कह सकते। यात्रा के दौरान पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया जाएगा और महाकाल से धर्म के नाम पर हो रही लूट को रोकने की ताकत मांगी जाएगी। उनका यह सफर ‘शिवधाम से रामधाम’ तक का होगा जिसका संदेश केवल यही है कि धर्म का उपयोग पैसों के लिए या राजनीतिक हथियार के रूप में कभी नहीं किया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *