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रिश्तों की नई मिसाल : ससुर ने विधवा बहू का पिता बनकर कराया पुनर्विवाह, समाज के लिए बनी प्रेरणा

रिश्तों की नई मिसाल : ससुर ने विधवा बहू का पिता बनकर कराया पुनर्विवाह, समाज के लिए बनी प्रेरणा
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भोपाल: रवि नाथानी
BDC NEWS | bhopalonline.org

अक्सर सास-ससुर और बहू के रिश्तों को लेकर समाज में कई तरह की बातें की जाती हैं, लेकिन राजधानी भोपाल से आई एक खबर ने इन सभी धारणाओं को तोड़कर इंसानियत की एक ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर किसी की आँखों में आँसू और मन में सम्मान भर देगी। यहाँ के कुलूखेड़ी स्थित राम रिसोर्ट में एक ऐसे विवाह का साक्षी बना, जिसने न केवल दो लोगों को जीवनसाथी बनाया, बल्कि एक विधवा बहू को ‘बेटी’ के रूप में नया जीवन भी दिया।

दुख से परे, खुशियों की एक नई शुरुआत

कुछ समय पहले परिवार के होनहार बेटे का कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के कारण निधन हो गया था। बेटे के जाने के बाद घर का चिराग तो बुझ गया, लेकिन ससुर ने अपनी विधवा बहू की सूनी होती जिंदगी को देखकर हार नहीं मानी। परिवार ने बहू को पराया मानने के बजाय उसे अपनी बेटी माना और यह संकल्प लिया कि उसका भविष्य फिर से खुशियों से महकेगा। ससुर के ये शब्द—“बेटा तो अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन बहू हमारी बेटी जैसी है। उसका जीवन दोबारा खुशियों से भर जाए, यही सोचकर हमने पिता की जिम्मेदारी निभाते हुए उसका कन्यादान किया”—उनकी महान सोच और अटूट प्रेम को दर्शाते हैं।

जब ससुर ने निभाई पिता की हर रस्म

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यह विवाह समारोह किसी आम शादी जैसा नहीं था; इसमें भावुकता और मानवीय संवेदनाओं का संगम था। ससुर ने एक पिता का फर्ज निभाते हुए विवाह की हर रस्म को पूरी निष्ठा और प्यार के साथ पूरा किया। दोनों परिवारों की मौजूदगी में, जब उन्होंने वैदिक रीति-रिवाजों के बीच अपनी बहू का कन्यादान किया, तो वहाँ मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम थीं। यह दृश्य समाज के लिए एक बड़ा संदेश था कि यदि परिवार का साथ हो, तो किसी भी दुख के बाद खुशियों की शुरुआत की जा सकती है।

समाज के लिए प्रेरणा: रूढ़ियों को तोड़ती एक नई सोच

विवाह समारोह में शामिल लोगों ने एक स्वर में इस पहल की प्रशंसा की। समाज के प्रबुद्ध वर्ग का मानना है कि विधवा पुनर्विवाह को लेकर जो सामाजिक झिझक और पुरानी रूढ़ियां आज भी कई जगह कायम हैं, उन्हें तोड़ने के लिए ऐसी सोच की बेहद आवश्यकता है। भोपाल के इस परिवार ने साबित कर दिया है कि संस्कार केवल रीति-रिवाजों में नहीं, बल्कि अपने परिजनों के दुख में खड़े होने और उनके उज्जवल भविष्य का मार्ग प्रशस्त करने में होते हैं। यह विवाह न केवल एक जोड़े का मिलन है, बल्कि समाज की बदलती और सकारात्मक दिशा की एक खूबसूरत तस्वीर है।



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