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होर्मुज स्ट्रेट में हमलों के बाद अमेरिकी सेना की जवाबी कार्रवाई

होर्मुज स्ट्रेट में हमलों के बाद अमेरिकी सेना की जवाबी कार्रवाई
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वॉशिंगटन। डिजिटल डेस्क
BDC NEWS | bhopalonline.org

मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने मंगलवार को आधिकारिक पुष्टि की कि होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य हमले शुरू कर दिए हैं।

‘भारी कीमत चुकानी पड़ेगी’: CENTCOM का सख्त संदेश

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक बयान जारी कर कहा कि यह सैन्य कार्रवाई उन हमलों का बदला है, जिसमें ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे तीन निर्दोष कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया था।

CENTCOM ने अपने आधिकारिक बयान में कहा-

“अमेरिकी सेंट्रल कमांड की सेना ने ईरान के खिलाफ कई शक्तिशाली हमले शुरू कर दिए हैं। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में बेगुनाह नागरिकों वाले कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने के लिए ईरान को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर करना है।”

अमेरिकी सैन्य अधिकारियों ने ईरान पर समुद्री सुरक्षा को खतरे में डालने और सीजफायर (युद्धविराम) समझौते के उल्लंघन का गंभीर आरोप लगाया है।

ईरान में कई धमाके, मची अफरा-तफरी

अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद दक्षिणी ईरान के कई हिस्सों में जोरदार धमाके सुने गए। ईरानी समाचार एजेंसी ‘फार्स’ के हवाले से बताया गया है कि:

  • सिरिक (Sirik) और केशम (Qeshm) के पास कई धमाके हुए।
  • बंदर अब्बास के पूर्व और पश्चिम में भी विस्फोटों की पुष्टि की गई है।
  • रिपोर्टों के अनुसार, सिरिक बंदरगाह पर व्यावसायिक और मछली पकड़ने वाली नौकाओं के घाटों पर प्रोजेक्टाइल (मिसाइल या रॉकेट) गिरने से भारी नुकसान की खबर है।

विवाद की जड़: तेल बैन और MoU का उल्लंघन

यह सैन्य तनाव केवल समुद्री हमलों तक सीमित नहीं है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर ‘मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) के अनुच्छेद 10 के उल्लंघन का आरोप लगाया है।

तनाव बढ़ने के कारण

  1. तेल बिक्री पर पाबंदी: अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने जून में जारी उस लाइसेंस को रद्द कर दिया, जो ईरान को 21 अगस्त तक कच्चे तेल की बिक्री और डिलीवरी की अनुमति देता था।
  2. विश्वास का संकट: ईरानी विदेश मंत्रालय ने इसे 18 जून को हुए समझौते का “बदनीयती” भरा उल्लंघन करार दिया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
  3. इजरायल-लेबनान मुद्दा: ईरान ने वाशिंगटन पर लेबनान के खिलाफ इजरायली सैन्य कार्रवाई में परोक्ष रूप से शामिल होकर समझौते की शर्तों को तोड़ने का भी आरोप लगाया है।

सवाल: क्या युद्ध की ओर बढ़ रहे हैं हालात?

अमेरिकी सैन्य हमले और ईरान द्वारा समझौते के उल्लंघन के आरोप, दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत को पूरी तरह पटरी से उतार सकते हैं। जहाँ अमेरिका समुद्री आवाजाही की सुरक्षा सुनिश्चित करने का दावा कर रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी अर्थव्यवस्था पर प्रहार मानते हुए कड़े तेवर अपनाए हुए है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम क्षेत्र में एक बड़े संघर्ष को जन्म दे सकता है।



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