काेलकाता। डिजिटल डेस्क
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर चल रहा सत्ता संघर्ष अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक गुट ने ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने और अभिषेक बनर्जी को निलंबित करने की घोषणा कर दी है।
‘असली टीएमसी’ और समानांतर नेतृत्व का दावा
न्यू टाउन में आयोजित एक विशेष बैठक में, ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने खुद को ‘असली टीएमसी’ घोषित किया है। बागी गुट का दावा है कि इस बैठक में 60 विधायक और 70 पार्षद मौजूद थे। इस गुट ने अरूप रॉय को पार्टी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। साथ ही, अरूप बिस्वास, फिरहाद हकीम, रथिन घोष और सबीना यास्मीन को उपाध्यक्ष का पद सौंपा गया है। ऋतब्रत बनर्जी का कहना है कि पार्टी का संवैधानिक कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी पुनर्गठन न होने के कारण यह कदम उठाना अनिवार्य था।
बैंक खातों पर संग्राम और कानूनी लड़ाई
पार्टी के करीब 440 करोड़ रुपये के तीन बैंक खातों के फ्रीज होने से विवाद और गहरा गया है। पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास द्वारा खातों को फ्रीज करने के अनुरोध के बाद स्थिति जटिल हो गई है। टीएमसी नेतृत्व ने इस कार्रवाई के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वहीं, बागी गुट ने पार्टी के चुनाव चिह्न और 1,100 करोड़ रुपये के पार्टी फंड पर अपना दावा ठोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
तीन हिस्सों में बंटी टीएमसी?
मौजूदा घटनाक्रम के बाद तृणमूल कांग्रेस तीन गुटों में विभाजित होती दिख रही है:
- ममता बनर्जी गुट: मूल टीएमसी नेतृत्व।
- ऋतब्रत बनर्जी गुट: ‘असली टीएमसी’ का दावा करने वाला बागी गुट।
- सांसद गुट: लगभग दो दर्जन लोकसभा सांसदों का धड़ा, जिन्होंने ‘नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया’ में विलय की बात कही है।
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