मुंबई |
BDC News | bhopalonline.org
2006 के मालेगांव बम धमाकों के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पेशल कोर्ट में चल रहे ट्रायल पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस फैसले से मामले के मुख्य आरोपियों—लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी, धनसिंह और मनोहर नरवरिया को बड़ी राहत मिली है।
मालेगांव धमाका केस: हाईकोर्ट ने क्यों रोकी ट्रायल की कार्यवाही?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बुधवार को 2006 के मालेगांव बम धमाकों से जुड़े मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। अदालत ने विशेष एनआईए (NIA) कोर्ट द्वारा तय किए गए आरोपों और चल रही सुनवाई पर रोक लगा दी है। इस निर्णय का सीधा लाभ इंदौर के पास महू के लोकेश शर्मा, देपालपुर के राजेंद्र चौधरी, धनसिंह और मनोहर नरवरिया को मिला है।
आरोपियों के वकील कौशिक म्हात्रे ने अदालत में दलील दी कि इस मामले में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी गवाह मौजूद नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि पूरी जांच स्वामी असीमानंद के 2010 के उस बयान पर टिकी थी, जिसे उन्होंने बाद में वापस ले लिया था। हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए ट्रायल को आगे बढ़ाने पर रोक लगा दी।
स्वामी असीमानंद का बयान और NIA की चार्जशीट
एनआईए ने इस मामले में लोकेश शर्मा, राजेंद्र चौधरी और दिवंगत सुनील जोशी सहित अन्य के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। जांच का मुख्य आधार स्वामी असीमानंद का वह बयान था, जिसमें उन्होंने धमाकों में ‘छह लड़कों’ के शामिल होने का जिक्र किया था। हालांकि, बाद में असीमानंद ने अपना बयान यह कहते हुए वापस ले लिया था कि यह दबाव में दिलवाया गया था। बचाव पक्ष का मुख्य तर्क यही है कि जिस बयान को वापस लिया जा चुका है, उसके आधार पर किसी के खिलाफ आरोप तय नहीं किए जा सकते।
31 लोगों की मौत और लंबी कानूनी लड़ाई
8 सितंबर 2006 को नासिक के मालेगांव में हुए चार सिलसिलेवार बम धमाकों ने देश को दहला दिया था। ये विस्फोट हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान के पास उस समय हुए थे जब लोग शुक्रवार की नमाज अदा कर रहे थे। इस भयावह घटना में 31 लोगों की जान गई थी और 312 से अधिक लोग घायल हुए थे।
शुरुआत में महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने 9 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया था, जिन्हें 2016 में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। बाद में जांच सीबीआई और फिर एनआईए को सौंपी गई, जिसने दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े लोगों को आरोपी बनाया।
आरोपियों का जेल और बेल का सफर
- 2013: लोकेश शर्मा और राजेंद्र चौधरी की गिरफ्तारी हुई।
- 2019: करीब 6 साल जेल में रहने के बाद हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दी। बेल देते समय कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि बिना ट्रायल के लंबे समय तक किसी को जेल में रखना न्यायोचित नहीं है।
- 2025: सितंबर में विशेष अदालत ने चारों के खिलाफ आरोप (Charges) तय किए।
- 2026: जनवरी में हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के इस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रायल पर रोक लगा दी।