नई दिल्ली/तेहरान|BDC News|bhopalonline.org
पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक चौंकाने वाले बयान और ईरान द्वारा भारत समेत मित्र देशों को दी गई रणनीतिक छूट ने वैश्विक कूटनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। जहाँ एक ओर नेतृत्व के स्तर पर जुबानी जंग तेज है, वहीं व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को लेकर ईरान ने अपने रुख में नरमी दिखाई है।
डोनाल्ड ट्रंप का ‘सुप्रीम लीडर’ वाला दावा और ईरान का पलटवार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान दावा किया कि उन्हें ईरान का ‘सुप्रीम लीडर’ बनने का प्रस्ताव मिला था, जिसे उन्होंने सिरे से ठुकरा दिया। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि उनकी इस पद में कोई रुचि नहीं है। राष्ट्रपति ने यह भी विश्वास जताया कि अमेरिका वर्तमान संघर्ष में बढ़त बना रहा है और आर्थिक व सैन्य दबाव के कारण ईरान समझौते की राह तलाश रहा है। हालांकि, ईरान ने ट्रंप के इन दावों को पूरी तरह आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया है और स्पष्ट किया है कि वर्तमान में अमेरिका के साथ किसी भी स्तर पर बातचीत नहीं हो रही है।
IRGC की सीधी चेतावनी: ‘युद्ध के मैदान को नरक न बनाएं’
तनाव के बीच ईरान के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने अमेरिका और इजराइल को गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। IRGC ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी सीमाओं पर कोई जमीनी हमला किया जाता है, तो जवाबी कार्रवाई इतनी भीषण होगी कि हमलावर देशों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। उन्होंने इजराइली और अमेरिकी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने राजनेताओं के ‘भ्रामक’ फैसलों के कारण अपने सैनिकों को युद्ध की आग में न झोंकें।
भारत के लिए रणनीतिक जीत: होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति
भारत के लिए सबसे राहत भरी खबर व्यापारिक मोर्चे से आई है। मुंबई स्थित ईरानी कॉन्सुलेट और न्यूज एजेंसी ANI के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे ‘मित्र देशों’ के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने की विशेष अनुमति दी गई है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग केवल उन देशों के लिए बंद या प्रतिबंधित है जो ईरान के विरुद्ध शत्रुतापूर्ण गतिविधियों में शामिल हैं।
होर्मुज मार्ग खुलने से भारत को मिलने वाले 5 प्रमुख लाभ
- ऊर्जा सुरक्षा की गारंटी: भारत अपनी पेट्रोलियम जरूरतों का लगभग 85% आयात करता है, जिसमें से आधा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। इस मार्ग के खुले रहने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- निरंतर तेल आपूर्ति: प्रतिदिन लगभग 50 लाख बैरल तेल की खपत वाले भारत के लिए बिना किसी रुकावट के सप्लाई चेन का बने रहना अनिवार्य है।
- कीमतों पर नियंत्रण: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का खतरा बना हुआ है। सुरक्षित मार्ग मिलने से भारतीय बाजार में ईंधन की कीमतें स्थिर रह सकती हैं।
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: युद्ध के जोखिम के कारण जहाजों के बीमा (Insurance) और मालभाड़े में जो 2-3 गुना बढ़ोतरी हुई थी, अब उसमें कमी आएगी।
- समय की बचत: खाड़ी देशों से भारत आने वाले मालवाहक जहाज अब बिना किसी लंबे डायवर्जन के 5 से 10 दिनों के भीतर भारतीय बंदरगाहों पर पहुँच सकेंगे।
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