सिंधी समाज और आध्यात्मिक जगत के लिए एक अत्यंत दुखद और अपूरणीय क्षति की खबर सामने आई है। करोड़ों सेवादारों और श्रद्धालुओं के दिलों की धड़कन, रूहानी मुस्कराहट के मालिक और परम पूज्य हाज़िर स्वरूप साईं साधराम साहेब जी अपना नश्वर शरीर त्यागकर सच्चे साईं की पावन ज्योत में विलीन (ब्रह्मलीन) हो गए हैं।
उनके देवलोकगमन की खबर फैलते ही देश-विदेश में बसे लाखों श्रद्धालुओं और प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। पूज्य साईं जी को एक ऐसे युगपुरुष के रूप में याद किया जा रहा है जो लाखों परिवारों के सुख-दुख का सहारा और आशा की किरण थे।

अंतिम दर्शन एवं पावन दिव्य संस्कार का पूरा कार्यक्रम
संत सतरामधाम, रहड़की साहेब (सिंध) द्वारा पूज्य साईं साहेब के पावन पार्थिव स्वरूप के अंतिम दर्शन और वैदिक व संत परंपरा के अनुसार होने वाले अंतिम संस्कार का कार्यक्रम निम्नानुसार जारी किया गया है..

पार्थिव देह का आगमन: 20 मई 2026, बुधवार सायंकाल 5:00 बजे पूज्य साईं साहेब का पावन पार्थिव स्वरूप ‘संत सतरामधाम, रहड़की साहेब, सिंध’ पहुंचेगा।
अंतिम दर्शन का समय: श्रद्धालु 20 मई 2026 सायंकाल 5:00 बजे से लेकर अगले दिन 21 मई 2026 प्रातः 9:00 बजे तक पूज्य साईं साहेब के अंतिम दर्शन कर सकेंगे।
अंतिम दिव्य क्रिया (संस्कार): 21 मई 2026, गुरुवार प्रातः 10:00 बजे वैदिक एवं संत परंपरा के अनुसार पूज्य साईं साहेब के पावन पार्थिव स्वरूप को पंचतत्व में विलीन करने की अंतिम दिव्य क्रिया संपन्न की जाएगी।
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श्रद्धालुओं से विशेष अपील: घरों में जलाएं एक दीप
‘संत सतरामधाम’ और सेवादारों ने श्रद्धालुओं से विनम्र अपील की है कि “सभी श्रद्धालु धैर्य बनाए रखें और इस दुखद समय में अपने-अपने घरों में एक दीप प्रज्वलित कर, ‘सच्चो सतराम’ का जाप करें। यही हमारी पूज्य साईं जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। भले ही साईं जी आज शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन रूहानी रूप से वे सदा हमारे साथ रहेंगे और हमारा मार्गदर्शन करते रहेंगे।”
आध्यात्मिक परंपरा को नई ऊंचाइयां दीं: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अपने शोक संदेश में कहा है कि सिंधी समाज के प्रमुख संत, पूज्य साधराम साहब जी के ब्रह्मलीन होने पर गहन शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संत साधराम जी ने सिंधी समाज की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा को नई ऊंचाइयां प्रदान कीं। मुख्यमंत्री ने ईश्वर से पूज्य साधराम जी की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और उनके अनुयायियों को यह दु:ख सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना की है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ संत साधराम साहेब के ब्रह्मलीन होने पर शोक व्यक्त किया है।

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