नई दिल्ली | BDC News| bhopal online. org
ऑनलाइन फूड डिलीवरी की दिग्गज कंपनी जोमैटो (Zomato) ने अपने करोड़ों ग्राहकों को एक बड़ा झटका दिया है। कंपनी ने अपनी प्लेटफॉर्म फीस (Platform Fee) में सीधे 19.2% की भारी बढ़ोतरी कर दी है। अब ग्राहकों को हर फूड ऑर्डर पर ₹12.50 के बजाय ₹14.90 (बिना जीएसटी के) चुकाने होंगे। अगर इसमें 18% जीएसटी जोड़ दिया जाए, तो प्रभावी रूप से यह शुल्क लगभग ₹17.58 प्रति ऑर्डर हो जाता है।
यह नई दरें शुक्रवार, 20 मार्च 2026 से पूरे देश में लागू कर दी गई हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों और ऊर्जा संकट के कारण लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ रही है।
क्यों बढ़ी प्लेटफॉर्म फीस? मुख्य कारण
जोमैटो ने आधिकारिक तौर पर इस बढ़ोतरी पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों और सूत्रों के अनुसार इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हैं
- वैश्विक ऊर्जा संकट और तेल की कीमतें: पश्चिम एशिया (Middle East) में चल रहे तनाव और युद्ध की स्थिति के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर भारत में ईंधन की कीमतों और डिलीवरी पार्टनर्स की परिचालन लागत पर पड़ा है।
- LPG और कमर्शियल गैस की कीमतों में उछाल: हाल ही में भारत में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में ₹115 तक की बढ़ोतरी देखी गई है। इससे रेस्टोरेंट पार्टनर्स का खर्च बढ़ा है, और प्लेटफार्मों पर मार्जिन बनाए रखने का दबाव बढ़ा है।
- मुनाफे पर ध्यान (Profitability Strategy): जोमैटो की मूल कंपनी ‘इटरनल’ (Eternal) अब केवल विकास (Growth) पर नहीं, बल्कि प्रति ऑर्डर मुनाफे (Unit Economics) को सुधारने पर ध्यान दे रही है। प्लेटफॉर्म फीस वह जरिया है जिसका पैसा सीधे कंपनी की जेब में जाता है, न कि रेस्टोरेंट या डिलीवरी पार्टनर के पास।
₹2 से ₹15 तक का सफर: ग्राहकों की जेब पर ‘स्लो पॉइजन’
जोमैटो ने प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत अगस्त 2023 में मात्र ₹2 से की थी। तब से अब तक इसमें 600% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है:
| समय काल | प्लेटफॉर्म फीस (प्रति ऑर्डर) |
| अगस्त 2023 | ₹2.00 |
| जनवरी 2024 | ₹4.00 |
| जुलाई 2024 | ₹6.00 |
| अक्टूबर 2024 (फेस्टिव सीजन) | ₹10.00 |
| सितंबर 2025 | ₹12.50 |
| मार्च 2026 (वर्तमान) | ₹14.90 |
नोट: जोमैटो गोल्ड (Zomato Gold) के सदस्यों को भी इस फीस से राहत नहीं दी गई है। भले ही उन्हें ‘फ्री डिलीवरी’ मिलती है, लेकिन प्लेटफॉर्म फीस का भुगतान उन्हें भी करना होगा।
कंपनी को कितना होगा फायदा?
आंकड़ों के मुताबिक, जोमैटो प्रतिदिन औसतन 22 लाख से 25 लाख ऑर्डर डिलीवर करता है। प्लेटफॉर्म फीस में मात्र ₹2.40 की इस मामूली दिखने वाली बढ़ोतरी से कंपनी की रोजाना की अतिरिक्त कमाई लगभग ₹50 लाख से ₹60 लाख बढ़ जाएगी। महीने के आधार पर देखें तो यह आंकड़ा ₹15 करोड़ से ₹18 करोड़ के बीच बैठता है। यह अतिरिक्त राजस्व सीधे कंपनी के ‘ऑपरेटिंग प्रॉफिट’ (EBITDA) में जुड़ता है।
प्रतिद्वंद्वियों की स्थिति: स्विगी बनाम मैजिकपिन
जोमैटो की इस बढ़ोतरी के बाद अब वह अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी स्विगी (Swiggy) के बराबर आ गया है। स्विगी वर्तमान में ₹14.99 (टैक्स सहित) प्लेटफॉर्म फीस ले रहा है। आमतौर पर देखा गया है कि जब एक कंपनी फीस बढ़ाती है, तो दूसरी भी जल्द ही उसका अनुसरण करती है।
वहीं, इस सेगमेंट के तीसरे बड़े खिलाड़ी मैजिकपिन (Magicpin) ने फिलहाल फीस न बढ़ाने का फैसला किया है। मैजिकपिन के सीईओ अंशू शर्मा ने कहा, “बढ़ती लागत के इस कठिन दौर में हमने अपनी प्लेटफॉर्म फीस (₹14.20) को न बढ़ाने का निर्णय लिया है ताकि ग्राहकों के लिए ऑनलाइन खाना सुलभ बना रहे।”
बाजार की प्रतिक्रिया
इस खबर के बाद शेयर बाजार में जोमैटो की पैरेंट कंपनी इटरनल (Eternal) के शेयरों में उछाल देखा गया। शुक्रवार को कंपनी का शेयर लगभग 1.86% की तेजी के साथ ₹233 के स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों को उम्मीद है कि इस कदम से कंपनी के अगले तिमाही नतीजों में सुधार होगा।
मध्यम वर्गीय परिवारों और युवाओं के लिए, जो नियमित रूप से बाहर से खाना ऑर्डर करते हैं, यह एक अतिरिक्त बोझ है। डिलीवरी चार्ज, पैकेजिंग चार्ज, जीएसटी और अब ₹15-₹17 की प्लेटफॉर्म फीस मिलकर एक ₹200 के ऑर्डर को ₹260-₹270 तक पहुंचा देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह बढ़ोतरी जारी रही, तो ग्राहक फिर से सीधे रेस्टोरेंट से ऑर्डर करने या ‘टेक-अवे’ (Take-away) मॉडल की ओर रुख कर सकते हैं।