- ईरानी महिला फुटबॉलरों पर मंडराया मौत का खतरा
- ट्रम्प ने की ऑस्ट्रेलिया से शरण देने की अपील
ट्रम्प ने कहा- ‘ आप नहीं तो अमेरिका तैयार’वाशिंगटन/कैनबरा। BDC NEWS|bhopalonone.org
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग अब केवल युद्ध के मैदान तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका असर खेल और मानवाधिकारों पर भी दिखने लगा है। ईरान-इजराइल युद्ध के 10वें दिन, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बड़ा मानवीय हस्तक्षेप करते हुए ऑस्ट्रेलिया में मौजूद ईरान की महिला फुटबॉल टीम को सुरक्षा और शरण देने की पुरजोर वकालत की है।
क्या है पूरा विवाद? राष्ट्रगान न गाकर जताया था विरोध
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ऑस्ट्रेलिया में आयोजित महिला एशियन कप के दौरान ईरानी महिला टीम ने अपने देश का राष्ट्रगान गाने से इनकार कर दिया।
- विरोध का कारण: 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों और देश की आंतरिक स्थिति के खिलाफ खिलाड़ियों ने मौन रहकर अपना विरोध दर्ज कराया।
- ईरान की प्रतिक्रिया: इस कदम को ईरान की कट्टरपंथी सरकार और वहां के मीडिया ने ‘देशद्रोह’ करार दिया है। ईरानी मीडिया में इन खिलाड़ियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उन्हें ‘गद्दार’ बताते हुए सजा देने की मांग उठने लगी है।
ट्रम्प की चेतावनी: ‘खिलाड़ियों को वापस भेजना होगी बड़ी मानवीय भूल’
राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) पर एक भावुक और सख्त पोस्ट साझा की। उन्होंने कहा:
“अगर इन बहादुर महिला खिलाड़ियों को वापस ईरान भेजा गया, तो उन्हें वहां गंभीर प्रताड़ना, लंबी सजा या अपनी जान से भी हाथ धोना पड़ सकता है। उन्हें वापस भेजना एक बड़ी मानवीय गलती होगी।”
ट्रम्प ने आगे स्पष्ट किया कि यदि ऑस्ट्रेलिया इन खिलाड़ियों को राजनीतिक शरण (Asylum) देने में संकोच करता है, तो अमेरिका इन बेटियों को आश्रय देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी अपील की है कि वे इन खिलाड़ियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
जंग का 10वां दिन: मिडिल ईस्ट में तनाव बरकरार
जंग के 10वें दिन भी इजराइल और ईरान के बीच हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। युद्ध की इस विभीषिका के बीच खिलाड़ियों का यह साहसिक कदम ईरान की सरकार के लिए बड़ी अंतरराष्ट्रीय फजीहत का कारण बन गया है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये खिलाड़ी ईरान लौटती हैं, तो उनके करियर और जीवन दोनों पर संकट आ सकता है।
