नई दिल्ली |BDC News|bhopalonline.org
बुजुर्गों के लिए बजट में अच्छी खबर आने की उम्मीद है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा 1 फरवरी को पेश किए जाने वाले आगामी बजट में एक बड़ी खुशखबरी दे सकती है। कोविड-19 महामारी के दौरान बंद की गई रेल किराए की रियायत (Concession) को सरकार फिर से बहाल करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, वित्त मंत्रालय और रेल मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर उच्च स्तरीय चर्चा अंतिम चरण में है।
महंगाई और स्वास्थ्य खर्च को देखते हुए विचार
वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर होने वाले भारी खर्च को देखते हुए सरकार उन्हें राहत देने का मन बना रही है। हालांकि, वित्तीय घाटे को संतुलित रखने के लिए इस बार रियायत के नियमों में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं। ऐसी संभावना है कि यह छूट केवल स्लीपर क्लास और 3AC जैसी श्रेणियों तक ही सीमित रखी जाए, ताकि रेलवे पर बहुत ज्यादा आर्थिक बोझ न पड़े।
महामारी से पहले क्या थे नियम?
कोविड से पहले, भारतीय रेलवे 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के पुरुषों को 40% और 58 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं को 50% की भारी छूट प्रदान करता था। यह सुविधा एसी और नॉन-एसी सभी श्रेणियों में उपलब्ध थी, जिससे हर साल करोड़ों बुजुर्गों को तीर्थयात्रा और सामाजिक कार्यों के लिए यात्रा करना आसान होता था।
क्यों बंद की गई थी रियायत?
रेलवे ने बढ़ते वित्तीय घाटे और परिचालन लागत का हवाला देते हुए इस सुविधा को रोक दिया था। आंकड़ों के अनुसार, केवल वरिष्ठ नागरिकों को दी जाने वाली इस छूट से रेलवे पर हर साल ₹1,600 करोड़ से ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त भार पड़ता था। पिछले तीन वर्षों से यात्री संघों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इसे फिर से शुरू करने की निरंतर मांग की जा रही है, जिस पर इस बजट में मुहर लगने की पूरी उम्मीद है।
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