क्या है ‘धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार’? अनुच्छेद 25 से 28 की पूरी व्याख्या जो हर भारतीय को पता होनी चाहिए

Right to Freedom of Religion Right to Freedom of Religion

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी ‘विविधता’ (Diversity) है। हमारे देश में अलग-अलग धर्मों, मान्यताओं और परंपराओं को मानने वाले लोग एक साथ रहते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि यह तालमेल कैसे बना रहता है? इसका जवाब छिपा है हमारे भारतीय संविधान (Indian Constitution) के भाग-3 में, जो हमें ‘धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार’ (Right to Freedom of Religion) देता है।

आज की इस स्पेशल रिपोर्ट में हम गहराई से समझेंगे कि अनुच्छेद 25 से 28 तक हमें क्या-क्या अधिकार मिले हैं और इनकी सीमाएं क्या हैं।

1. धर्मनिरपेक्षता (Secularism) और भारतीय संविधान

मौलिक अधिकार : भारत एक ‘धर्मनिरपेक्ष’ (Secular) देश है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत धर्म के खिलाफ है, बल्कि इसका मतलब है कि राज्य (State) का अपना कोई राजकीय धर्म नहीं है। संविधान की प्रस्तावना में ‘पंथनिरपेक्ष’ शब्द 42वें संशोधन द्वारा जोड़ा गया था। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार सभी धर्मों को समान सम्मान और सुरक्षा देगी।

2. अनुच्छेद 25: अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म को मानने का अधिकार

अनुच्छेद 25 (Article 25) व्यक्तिगत धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। यह कहता है कि सभी व्यक्तियों को समान रूप से अंतरात्मा की स्वतंत्रता और धर्म को स्वतंत्र रूप से मानने, आचरण करने और प्रचार करने का अधिकार है।

इसके मुख्य बिंदु:

  • अंतरात्मा की स्वतंत्रता: आप अपने अंदर किसी भी भगवान या विचार को मानने के लिए स्वतंत्र हैं।
  • मानने का अधिकार (Right to Profess): आप खुले तौर पर अपने धार्मिक विश्वास की घोषणा कर सकते हैं।
  • आचरण का अधिकार (Right to Practice): आप पूजा, परंपराएं और धार्मिक अनुष्ठान कर सकते हैं।
  • प्रचार का अधिकार (Right to Propagate): आप अपने धार्मिक विचारों का प्रसार कर सकते हैं, लेकिन इसमें ‘जबरन धर्मांतरण’ शामिल नहीं है।

3. अनुच्छेद 26: धार्मिक मामलों के प्रबंधन की स्वतंत्रता

जहाँ अनुच्छेद 25 व्यक्तिगत अधिकार की बात करता है, वहीं अनुच्छेद 26 (Article 26) सामूहिक धार्मिक अधिकारों (Religious Denominations) की बात करता है।

इसके अंतर्गत धार्मिक संस्थाओं को निम्नलिखित अधिकार मिलते हैं:

  1. धार्मिक और धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए संस्थानों की स्थापना और रखरखाव करना।
  2. धर्म के मामलों में अपने स्वयं के कार्यों का प्रबंधन (Manage) करना।
  3. चल और अचल संपत्ति (Movable and Immovable Property) का स्वामित्व और अधिग्रहण करना।
  4. कानून के अनुसार ऐसी संपत्ति का प्रशासन करना।

4. अनुच्छेद 27: धर्म की वृद्धि के लिए कर (Tax) से मुक्ति

भारतीय संविधान यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी खजाने (Tax Payers’ Money) का इस्तेमाल किसी एक विशेष धर्म को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाएगा।

अनुच्छेद 27 के मुख्य प्रावधान:

  • किसी भी व्यक्ति को ऐसा टैक्स देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, जिसका इस्तेमाल किसी विशेष धर्म या धार्मिक संप्रदाय के रखरखाव के लिए किया जाना हो।
  • हालाँकि, सरकार धार्मिक स्थलों पर बुनियादी सुविधाएं देने के लिए ‘शुल्क’ (Fee) लगा सकती है, लेकिन ‘टैक्स’ नहीं।

5. अनुच्छेद 28: शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा पर रोक

यह अनुच्छेद शिक्षण संस्थानों में दी जाने वाली धार्मिक शिक्षा के बारे में नियम तय करता है। इसे समझने के लिए संस्थानों को चार श्रेणियों में बांटा गया है:

  1. पूरी तरह राज्य द्वारा संचालित संस्थान: यहाँ किसी भी प्रकार की धार्मिक शिक्षा नहीं दी जा सकती।
  2. राज्य द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थान: यहाँ स्वैच्छिक आधार पर धार्मिक शिक्षा दी जा सकती है।
  3. राज्य से सहायता प्राप्त संस्थान: यहाँ भी छात्र की सहमति (या नाबालिग होने पर माता-पिता की सहमति) जरूरी है।
  4. धार्मिक बंदोबस्त या ट्रस्ट द्वारा स्थापित संस्थान: यहाँ धार्मिक शिक्षा दी जा सकती है।

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6. क्या धार्मिक स्वतंत्रता असीमित (Unlimited) है?

यह एक बहुत बड़ा भ्रम है कि धार्मिक स्वतंत्रता पर कोई रोक नहीं है। संविधान ने स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार निम्नलिखित आधारों पर प्रतिबंधित किया जा सकता है:

  • सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order): यदि किसी धार्मिक गतिविधि से दंगे या अशांति फैलती है।
  • नैतिकता (Morality): समाज की नैतिकता को ध्यान में रखना जरूरी है।
  • स्वास्थ्य (Health): यदि किसी प्रथा से लोगों के स्वास्थ्य को खतरा हो।
  • अन्य मौलिक अधिकार: धार्मिक स्वतंत्रता किसी के जीवन के अधिकार या समानता के अधिकार का हनन नहीं कर सकती।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या अनुच्छेद 25 के तहत धर्म परिवर्तन कानूनी है?

उत्तर: हाँ, अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना अनुच्छेद 25 के तहत आता है। लेकिन लालच, डर या जबरदस्ती कराया गया धर्मांतरण गैर-कानूनी है

प्रश्न 2: क्या विदेशी नागरिकों को भी भारत में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार है?

उत्तर: हाँ, अनुच्छेद 25 से 28 के तहत मिलने वाले अधिकार नागरिकों और गैर-नागरिकों (विदेशी) दोनों को प्राप्त हैं।

प्रश्न 3: क्या सरकार धार्मिक ट्रस्टों के पैसे का इस्तेमाल कर सकती है?

उत्तर: सरकार धार्मिक संपत्तियों का प्रशासन कानून के दायरे में कर सकती है, लेकिन वह उस पैसे का उपयोग अपने निजी या धर्म-विरोधी कार्यों के लिए नहीं कर सकती।

प्रश्न 4: स्कूलों में ‘सरस्वती वंदना’ क्या अनुच्छेद 28 का उल्लंघन है?

उत्तर: यह संस्थान के प्रकार पर निर्भर करता है। सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता यदि कोई छात्र आपत्ति जताता है।

निष्कर्ष (Conclusion)

धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार (Right to Freedom of Religion) हमारे लोकतंत्र की नींव है। अनुच्छेद 25 से 28 यह सुनिश्चित करते हैं कि भारत का हर व्यक्ति गरिमा के साथ अपने विश्वास का पालन कर सके। यह अधिकार हमें सहिष्णुता और भाईचारे का संदेश देते हैं। हालांकि, अधिकारों के साथ-साथ हमारी यह जिम्मेदारी भी है कि हम दूसरों की मान्यताओं का सम्मान करें और कानून की मर्यादा न तोड़ें।

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