भोपाल का इतिहास
चलिए जोड़ते है.. आपको भोपाल के इतिहास से। क्या नाम था भोपाल का। किस अफगानी यौद्धा ने रखी थी आधुनिक भोपाल की नींव। कब से कब तक रहा बेगमों का शासन। कब मिला रियासत का दर्जा।

स्रोत : जैमनी जनरेटिट इमैज
परमार राजा भोज की नगरी (11वीं सदी):
भोपाल का नाम राजा भोजपाल से लिया गया माना जाता है, जिन्होंने 11वीं शताब्दी में इस क्षेत्र पर शासन किया था। उन्होंने यहाँ एक बांध (पाल) बनवाया था, जिससे भोजपाल (भोज का बांध) नाम पड़ा। यह शुरुआती दौर भोपाल को एक हिंदू शासक की दूरदृष्टि का प्रमाण देता है।
गोंड राज्य का हिस्सा (14वीं-17वीं सदी):
परमारों के बाद, भोपाल का क्षेत्र गोंड राजाओं के अधीन आ गया। 14वीं शताब्दी में यादवराम नामक एक गोंड योद्धा ने गढ़ मंडला को अपनी राजधानी बनाकर गोंड साम्राज्य स्थापित किया, जिसमें भोपाल भी शामिल था। गोंड रानी कमलापति का भी इस क्षेत्र से संबंध रहा है।
आधुनिक भोपाल की स्थापना (18वीं सदी):
18वीं शताब्दी की शुरुआत में, मुगल सेना के एक अफगान सैनिक, दोस्त मोहम्मद खान ने आधुनिक भोपाल की नींव रखी। औरंगजेब की मृत्यु के बाद, उन्होंने राजनीतिक रूप से अस्थिर मालवा क्षेत्र में अपनी शक्ति बढ़ाई और 1722 में भोपाल को अपनी राजधानी बनाने का फैसला किया। यह एक महत्वपूर्ण मोड़ था जिसने भोपाल को एक इस्लामी रियासत के रूप में स्थापित किया।
महिला सशक्तिकरण का अनूठा दौर (19वीं-20वीं सदी):
भोपाल की सबसे अलग और दिलचस्प कहानियों में से एक यहाँ की बेगमों का शासन है। 1819 से 1926 तक, भोपाल पर चार शक्तिशाली महिलाओं – कुदसिया बेगम, सिकंदर बेगम, शाहजहां बेगम और कैखुसरो जहां बेगम – ने शासन किया। यह उस दौर में भारतीय रियासतों में एक असाधारण घटना थी। इन बेगमों ने न केवल कुशलता से शासन किया बल्कि शहर के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसमें जलworks, रेलवे, डाक प्रणाली और नगर पालिका की स्थापना शामिल है।
ब्रिटिश संरक्षण और रियासत का दर्जा:
1818 में, भोपाल ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ एक संधि पर हस्ताक्षर करने के बाद एक रियासत बन गया। बेगमों ने ब्रिटिश आधिपत्य के तहत शासन किया, लेकिन अपनी स्वायत्तता बनाए रखी।
भारत में विलय में अंतिम रियासतों में से एक:
भारत की स्वतंत्रता के बाद, भोपाल के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान ने शुरू में भोपाल को एक स्वतंत्र इकाई के रूप में बनाए रखने की इच्छा व्यक्त की। हालाँकि, 1949 में लोकप्रिय आंदोलनों के बाद, भोपाल का भारत संघ में विलय हो गया।
भोपाल गैस त्रासदी (1984):
यह पुरानी हिस्ट्री का हिस्सा नहीं है, लेकिन 1984 की यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी भोपाल के इतिहास में एक दुखद और महत्वपूर्ण घटना है, जिसने शहर और दुनिया भर पर गहरा प्रभाव डाला।
भोपाल की पुरानी हिस्ट्री हिंदू और मुस्लिम शासकों के संगम, एक शक्तिशाली महिला शासकों की विरासत और अंततः भारतीय गणराज्य में इसके एकीकरण की एक अनूठी कहानी है। यह शहर आज भी अपनी ऐतिहासिक इमारतों, झीलों और सांस्कृतिक ताने-बाने में उस समृद्ध अतीत की झलक दिखाता है।
भोपाल के इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
भोपाल का प्राचीन नाम ‘भोजपाल’ माना जाता है। यह नाम 11वीं सदी के परमार राजा भोज के नाम और उनके द्वारा बनवाए गए बांध (पाल) के मेल से बना था। समय के साथ यह बदलकर भोपाल हो गया।
आधुनिक भोपाल की स्थापना किसने और कब की?
आधुनिक भोपाल की नींव 18वीं शताब्दी (1722 ई.) में एक अफगान योद्धा दोस्त मोहम्मद खान ने रखी थी। मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु के बाद उन्होंने इस क्षेत्र को अपनी राजधानी बनाया।
भोपाल में ‘बेगमों का शासन’ कब से कब तक रहा?
भोपाल में बेगमों का शासन 1819 से 1926 तक, यानी लगभग 107 वर्षों तक रहा। इस दौरान चार प्रमुख महिला शासिकाओं ने भोपाल की कमान संभाली।
भोपाल की चार प्रसिद्ध महिला शासिकाएं (बेगमें) कौन थीं?
भोपाल पर शासन करने वाली चार बेगमें थीं:
1. कुदसिया बेगम (गौहर बेगम)
2. सिकंदर जहाँ बेगम
3. शाहजहाँ बेगम
4. कैखुसरो जहाँ बेगम (सुल्तान जहाँ बेगम)
भोपाल को रियासत का दर्जा कब मिला?
भोपाल 1818 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ संधि करने के बाद एक रियासत (Princely State) बना। इसके बाद यहाँ के शासकों ने ब्रिटिश संरक्षण में शासन किया।
रानी कमलापति का भोपाल के इतिहास में क्या महत्व है?
रानी कमलापति गोंड साम्राज्य की अंतिम हिंदू रानी थीं। उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए दोस्त मोहम्मद खान की मदद ली थी, लेकिन बाद में परिस्थितियों के कारण भोपाल का नियंत्रण दोस्त मोहम्मद खान के हाथों में चला गया।
भोपालडॉट कॉम, फीचर डेस्क





