नारी शक्ति वंदन सम्मेलन 2026
नई दिल्ली:
BDC News | bhopalonlie.org
राजधानी दिल्ली के विज्ञान भवन में ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ चल रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि देश की संसद एक ऐसा नया इतिहास रचने जा रही है, जो अतीत के अधूरे सपनों और भविष्य के महान संकल्पों को जोड़ने का काम करेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में घोषणा की कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को समयबद्ध तरीके से लागू करने और लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को निर्णायक बनाने के लिए 16 अप्रैल से संसद के बजट सत्र की विशेष बैठक आयोजित की जा रही है।
पीएम मोदी के संबोधन की 5 बड़ी बातें

- ऐतिहासिक निर्णय: प्रधानमंत्री ने महिला आरक्षण को 21वीं सदी का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय बताया, जो केवल एक कानून नहीं बल्कि देश की करोड़ों माताओं-बहनों को समर्पित एक वंदन है।
- सामाजिक न्याय का संकल्प: उन्होंने कहा कि हम एक ऐसे समतामूलक भारत का निर्माण कर रहे हैं, जहाँ सामाजिक न्याय महज एक नारा न होकर हमारी कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो।
- विरासत और श्रद्धांजलि: बैसाखी और नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ पीएम ने जलियांवाला बाग के बलिदानियों को नमन किया। उन्होंने याद दिलाया कि 2023 में नई संसद में लिया गया पहला कदम आज अपनी पूर्णता की ओर है।
- दशकों की प्रतीक्षा का अंत: प्रधानमंत्री के अनुसार, 16 से 18 अप्रैल के बीच का समय भारत की विधानसभाओं और संसद के लिए दशकों पुरानी प्रतीक्षा को समाप्त करने वाला होगा।
- शक्ति का आशीर्वाद: उन्होंने विश्वास जताया कि इस अधिनियम के लागू होने से लोकतंत्र को नई ऊर्जा मिलेगी और देश की ‘मातृशक्ति’ का आशीर्वाद इस विकास यात्रा का आधार बनेगा।
‘बेटी बचाओ’ से ‘बेटी बढ़ाओ’ तक का सफर
इस सम्मेलन में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी हिस्सा लिया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण की यात्रा का खाका खींचते हुए प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की सराहना की।
- युगों का परिवर्तन: सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि हमने अपनी यात्रा ‘बेटी बचाओ’ से शुरू की थी, जब बेटियों का अस्तित्व संकट में था। फिर हम ‘बेटी पढ़ाओ’ के दौर से गुजरे और आज पीएम मोदी के नेतृत्व में हम ‘बेटी बढ़ाओ’ के गौरवशाली युग में पहुंच चुके हैं।
- बहनों का समर्थन: उन्होंने प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया कि संसद में पेश किए गए इस विधेयक के साथ देश की हर महिला चट्टान की तरह खड़ी है।
- काव्यात्मक आभार: अपने भाषण के समापन पर उन्होंने पीएम मोदी के व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए दो पंक्तियाँ समर्पित कीं:“कुछ लोग आए, वक्त के सांचे में ढल गए, और कुछ लोग आए, वक्त के सांचे बदल गए।”
संसद का विशेष सत्र: 16 अप्रैल से रणनीति
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के क्रियान्वयन की दिशा में 16, 17 और 18 अप्रैल का समय अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष सत्र के दौरान परिसीमन और आरक्षण के तकनीकी पहलुओं पर मुहर लगने की संभावना है, जिससे आगामी चुनावों में महिलाओं की भागीदारी का मार्ग प्रशस्त होगा।
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