किरिबाती से शुरू हुआ नए साल का सफर, सिडनी की रोशनी और जापान की घंटियों के बीच दुनिया ने किया
कालचक्र ने एक और करवट ली है और दुनिया ने साल 2025 को विदा कर 2026 का बाहें फैलाकर स्वागत किया है। प्रशांत महासागर के द्वीपों से शुरू हुआ यह जश्न अब धीरे-धीरे पूरी दुनिया को अपनी आगोश में ले रहा है। कहीं आतिशबाजी का शोर है, तो कहीं घंटियों की गूँज के साथ आध्यात्मिक शांति।
दुनिया में सबसे पहले यहाँ दी दस्तक
साल 2026 का सबसे पहला सूरज किरिबाती (किरीटीमाटी द्वीप) पर उगा। यह दुनिया का वह कोना है जहाँ नया साल सबसे पहले दस्तक देता है। भारत से करीब 8 घंटे 30 मिनट आगे चलने वाले इस द्वीप समूह पर लोगों ने उत्साह के साथ 2026 का आगाज किया।
न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया: आसमान में रंगों की बौछार
- न्यूजीलैंड: ऑकलैंड के स्काई टावर से हुई शानदार आतिशबाजी ने बारिश के बावजूद लोगों का दिल जीत लिया। करीब 3,500 पटाखों ने 240 मीटर ऊंचे टावर को रोशनी से नहला दिया।
- ऑस्ट्रेलिया: सिडनी हार्बर ब्रिज और ओपेरा हाउस पर हुई आतिशबाजी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यहाँ जैसा जश्न दुनिया में विरला ही है। लाखों लोग इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।
एशियाई देशों का अनूठा संगम: तकनीक और परंपरा
- जापान: यहाँ 108 बार मंदिर की घंटियां बजाकर (जोया नो काने) इंसानी दोषों को त्यागने की परंपरा निभाई गई।
- सिंगापुर और फिलीपींस: मनीला और मरीना बे में आधुनिक लेजर शो और काउंटडाउन क्लॉक्स के जरिए युवाओं ने संगीत की धुनों पर साल का स्वागत किया।
- चीन: शंघाई और हांगकांग की गगनचुंबी इमारतों पर डिजिटल घड़ियों ने जैसे ही 12 बजाए, पूरा आसमान रोशनी से जगमगा उठा।
- कोरिया: उत्तर और दक्षिण कोरिया में विशाल ऐतिहासिक घंटियों की गूँज के साथ नकारात्मकता को विदा कर सुख-समृद्धि की कामना की गई।
गुवाहाटी का आखिरी सूर्यास्त
साल 2025 की अंतिम विदाई का सबसे सुंदर दृश्य असम के गुवाहाटी से मिला। ब्रह्मपुत्र नदी के सीने पर जब साल का आखिरी सूरज डूबा, तो पूरा आसमान सुनहरे और नारंगी रंगों की चादर में लिपट गया। यह नजारा 2025 की यादों को समेटने और 2026 की नई उम्मीदों को जगाने वाला था।
भारत: राष्ट्रपति का संदेश
भारत में जश्न की शुरुआत से पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने 2026 को नई ऊर्जा, सामाजिक सद्भाव और पर्यावरण संरक्षण का साल बनाने का आह्वान किया।