नई दिल्ली: BDC News
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘प्रगति’ (PRAGATI) मंच की 50वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए देश के विकास का नया विजन पेश किया। पीएम मोदी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘सुधार (Reform), प्रभावी क्रियान्वयन (Execute) और व्यापक परिवर्तन (Transform)’ का त्रिसूत्र अनिवार्य है। उन्होंने पिछले एक दशक की शासन यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि अब सरकारी फाइलों में नहीं, बल्कि जमीन पर परिणामों की गति दिख रही है।
मुख्य बिंदु: एक नजर में
- ऐतिहासिक उपलब्धि: प्रगति मंच के जरिए अब तक 85 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को गति दी जा चुकी है।
- समाधान की दर: 2014 से अब तक समीक्षा के लिए आए 3,162 मुद्दों में से लगभग 94% (2,958 मुद्दे) का समाधान निकाला गया है।
- बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा: बैठक में सड़क, रेल, बिजली और जल संसाधन जैसे 5 प्रमुख क्षेत्रों की समीक्षा हुई, जिनकी लागत 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है।
प्रक्रिया नहीं, समाधान पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधारों का असली उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को बदलना नहीं, बल्कि समस्याओं का स्थायी समाधान खोजना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी तंत्र को इतना अनुकूल बनाया जाए कि व्यापार और आम जीवन (Ease of Living) में सुगमता आए। पीएम ने जोर दिया कि किसी भी प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन में समय, लागत और गुणवत्ता—इन तीनों मानकों पर कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
पीएम श्री योजना: शिक्षा का बनेगा नया बेंचमार्क
स्कूली शिक्षा की समीक्षा करते हुए पीएम मोदी ने ‘पीएम श्री’ (PM SHRI) योजना को भविष्य के लिए तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा कि इन स्कूलों को केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित न रखें, बल्कि इन्हें शिक्षा की गुणवत्ता का ‘राष्ट्रीय मानक’ (National Benchmark) बनाएं। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड विजिट कर जमीनी स्तर पर मूल्यांकन करने की सलाह दी।
दशकों से अटकी योजनाएं हुई पूरी
पीएम मोदी ने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे ‘प्रगति’ की निरंतर निगरानी से दशकों से लंबित प्रोजेक्ट्स पूरे हुए हैं:
- असम का बोगीबील रेल-सह-सड़क पुल।
- जम्मू-बारामूला रेल लिंक।
- नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा।
- भिलाई स्टील प्लांट का आधुनिकीकरण।
सहकारी संघवाद का जीवंत उदाहरण
प्रधानमंत्री ने बताया कि प्रगति मंच उनके गुजरात के मुख्यमंत्री काल के अनुभवों (SWAGAT) का विस्तार है। यह केवल एक समीक्षा बैठक नहीं है, बल्कि ‘टीम इंडिया’ और सहकारी संघवाद का प्रतीक है, जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर जटिल मुद्दों का समाधान निकालते हैं। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे भी अपने यहाँ मुख्य सचिव स्तर पर इस तरह के तंत्र को संस्थागत बनाएं ताकि 2047 के संकल्प को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।